पुणे ऑटो ड्राइवर इको फ्रेंडली इनिशिएटिव: चलाते हैं 'गार्डन रिक्शा', भीषण गर्मी में 'नेचुरल एसी' का मजा

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Apr 08, 2024, 11:57 AM ISTUpdated : Apr 08, 2024, 12:08 PM IST
पुणे ऑटो ड्राइवर इको फ्रेंडली इनिशिएटिव: चलाते हैं 'गार्डन रिक्शा', भीषण गर्मी में 'नेचुरल एसी' का मजा

सार

पूणे के ऑटो ड्राइवर गणेश नाणेकर भीषण गर्मी से निपटने के लिए अद्भुत तरीका अपना रहे हैं। रिक्शे को गमलों से सजाया है, जो पैसेंजर्स को 'नेचुरल एसी' सा अनुभव देता है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।

पुणे। भीषण गर्मी में जब लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पुणे के ऑटो रिक्शा  ड्राइवर गणेश नाणेकर का इको फ्रेंडली इनिशिएटिव चर्चा में है। उन्होंने रिक्शे में तरह-तरह के पेड़ लगाए हैं। माय नेशन हिंदी से बात करते हुए वह कहते हैं कि लोग मेरे ऑटो रिक्‍शा को गार्डन रिक्शा कहते हैं। यह पैसेंजर्स के सफर को यादगार बना रहा है। लोग कितने भी तनाव में हों, पर जब ऑटो में बैठते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। इस काम से मुझे भी खुशी मिल रही है। 

कैसे मिली प्रेरणा?

ऑटो में पौधे लगाने का श्रेय अपनी पत्‍नी को देते हुए वह कहते हैं कि मुझे और मेरी पत्नी को पौधे लगाने की आदत है। पहले बॉटल में मनी प्लांट का पौधा लगाकर रिक्शे में रखा। जैसे—जैसे उसकी ग्रोथ हो रही थी। लोगों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा था। पैसेंजर्स कहते थे कि अच्छा दिख रहा है। वहीं से रिक्शे में पौधे लगाने की प्रेरणा मिली। पहले एक कुंडी (गमला) लगाया और फिर निर्णय लिया कि रिक्शे में और गमले लगाएंगे। 

 

ऑटो रिक्‍शे में 18 गमले

गणेश कहते हैं कि ऑटो में तुलसी, गोकरन, फूल और सजावटी पौधे लगाए हैं। रिक्शे में अभी 18 गमले और दो बॉटल में मनी प्लांट हैं। उसकी वजह से भीषण गर्मी में भी पैसेंजर्स को सूरज की तपिश का एहसास नहीं होता है। पौधों की देखभाल में भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। दिन में तीन बार पानी देने के अलावा सप्ताह में दो बार खाद डालते हैं।  कोकोपीट खाद (नारियल की भूसी से तैयार कृत्रिम खाद) का यूज करते हैं। ताकि गमलों में नमी बनी रहे और खाद का दुष्प्रभाव भी पैसेंजर्स पर न पड़े।

लोगों को पौधारोपण का भी दे रहे संदेश

उन्होंने ऑटो रिक्‍शा में पौधे लगाने से पहले इस बारे में जानकारी इकट्ठा कि किस तरह के पौधे गाड़ी में जीवित रह सकते हैं। वृक्ष विशेषज्ञों से राय ली और फिर पौधे लगाएं। वह कहते हैं कि रिक्शे के जरिए खुशी बांटने के अलावा लोगों को संदेश भी दे रहा हॅूं कि 'पेड़ लगाओ, धरती जगाओ।' मौजूदा समय में हरियाली कम होती जा रही है। यह हमारे पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने अपने रिक्शे का नाम 'मेरी वसुंधरा' दिया है। बहरहाल, उनकी यह पहल लोगों के बीच चर्चा बनी हुई हैं और उनके इस प्रयास की सराहना हो रही है।

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