पैर खोए, हौसला नहीं: तैराकी में मिसाल बने शम्स आलम

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Nov 13, 2024, 01:04 PM ISTUpdated : Nov 13, 2024, 01:06 PM IST
पैर खोए, हौसला नहीं: तैराकी में मिसाल बने शम्स आलम

सार

शम्स आलम की प्रेरणादायक कहानी: मधुबनी के इस साहसी तैराक ने जीवन की कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए गंगा नदी में 13 किलोमीटर तैरकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 

मधुबनी। मधुबनी जिले के शम्स आलम ने कठिन परिस्थितियों को हराकर जो मुकाम हासिल किया है, वह सबके लिए प्रेरणा है। उन्होंने चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर इतिहास रच दिया। हाल ही में पटना में 14वें नेशनल तक्षशिला ओपन वाटर स्विमिंग प्रतियोगिता में तैराकी का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। गंगा नदी के शिव घाट दीघा से लॉ कॉलेज घाट तक 13 किलोमीटर तक तैराकी की, जबकि वह पैराप्लेजिया से पीड़ित हैं। 

मार्शल आर्ट्स से करियर की शुरूआत

शम्स आलम ने अपने करियर की शुरुआत मार्शल आर्ट्स से की थी, जिसमें वे ब्लैक बेल्ट होल्डर भी थे। लेकिन 24 साल की उम्र में उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जब स्पाइनल कॉर्ड की गंभीर बीमारी के चलते उनके कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। डॉक्टरों और परिवार वालों की प्रेरणा से शम्स ने तैराकी में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। 

रेगुलर प्रैक्टिस कर बनें सफल स्विमर

शम्स ने तैराकी को अपना सहारा बना लिया। पानी में कठिन परिस्थितियों का सामना करना और अपनी कमजोरी को ताकत में बदलना कोई आसान काम नहीं था। शम्स ने रेगुलर प्रैक्टिस की। खुद को डेली बेहतर बनाने के प्रयास करते रहें, और जल्द ही एक सक्सेसफुल स्विमर बन गए।

13 किलोमीटर तैर कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

शम्स आलम ने पटना में आयोजित ओपन वाटर स्विमिंग प्रतियोगिता में भाग लिया, जो उनके लिए कई मायनों में चुनौतीपूर्ण था। गंगा नदी के खुले पानी में तैरना, जिसमें कई तरह के जीव-जंतु और अनिश्चित परिस्थितियां होती हैं, यह एक सामान्य स्वीमिंग पूल में तैरने से बिल्कुल अलग था। शम्स ने 13 किलोमीटर की दूरी तैर कर तय की और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर खुद को स्थापित किया।

खुले पानी में तैरना खतरनाक

38 वर्षीय शम्स का कहना है कि इस प्रतियोगिता के बारे में पता चलते ही उन्होंने तैयारी शुरू कर दी थी। उनका मानना है कि खुले पानी में तैरना खतरनाक और चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन उनके आत्मविश्वास और तैयारी ने उन्हें इस कठिन चुनौती को पार करने में मदद की। उनके अनुसार, इस प्रकार की तैराकी में सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक तैयारी भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है।

संघर्ष के दिनों में परिवार ने नहीं छोड़ा साथ

शम्स के परिवार ने संघर्ष के दिनों में उनका साथ नहीं छोड़ा। उनके बड़े भाई मोहम्मद बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसकी वजह से शम्स का इलाज सही ढंग से नहीं हो सका और उनकी स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। हालांकि, तैराकी का शौक हमेशा से ही शम्स के जीवन का हिस्सा रहा। उनके भाई बताते हैं कि शम्स ने हर दिन तैराकी के प्रति प्यार और लगन को बनाए रखा।

गांव के तालाब में सीखी स्विमिंग

उनके पिता मोहम्मद रशीद अपने बेटे की उपलब्धि पर खुश हैं। वे बताते हैं कि शम्स बचपन से ही पढ़ाई और खेल में बहुत तेज था, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अधिक संसाधन नहीं मिल पाए। गांव के तालाब में तैरकर स्विमिंग सीखी। यहीं से उन्होंने तैराकी के बुनियादी गुर सीखे।

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