
सूरत। मौजूदा दौर में खेती-किसानी में केमिकल का बढ़ता चलन लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। गुजरात के एग्रीकल्चर ग्रेजुएट अश्विन नारिया को भी साल 2002 में इस बारे में किसी ने जानकारी दी। आर्गेनिक फॉर्मिंग करने के लिए कहा तो उन्होंने इस पर रिसर्च शुरु किया और नेचुरल फॉर्मिंग के लिए पंच संस्कार मॉडल प्रैक्टिस में लाएं। माय नेशन हिंदी से बात करते हुए वह कहते हैं कि हर परिवार को डेली सब्जी की जरुरत होती है। सब्जियों को उगाने में ज्यादा केमिकल का यूज हो रहा है। ऐसे में नेचुरल तरीके से केमिकल फ्री सब्जी कैसे उगाएं। उसके लिए जुगाड़ से 'एसी मंडप' बनाया। रिसर्च करके फॉइव लेयर मॉडल तैयार किया।
कैसे 'एसी मंडप' में उगाते हैं सब्जियां?
अश्विन नारिया ने यह 'एसी मंडप' जुगाड़ से बनाया। 25 फीट ऊंचाई पर वायर लगाने के लिए प्लास्टिक के मैटेरियल से बने पाइप का यूज किया। मंडप के अपर लेयर में बेल वाली सब्जी। मिडिल लेयर में टोमैटो आदि। ग्राउंड लेयर में पम्पकिन, ककड़ी और इंटर ब्लॉक एरिया में ट्यूबर वेजिटेबल जैसे-पोटैटो और टरमरिक आदि सब्जियां लगाईं। वह कहते हैं कि एक के ऊपर एक सब्जी लगाई। जिस सब्जी को छांव चाहिए, उसे छांव में रखे और जिस वेजिटेबल को छाया नहीं चाहिए। उसे ऊपर लगाइए। आजकल ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा इशू है। गर्मी के मौसम में टेम्प्रेचर बढ़ जाता है। इसको देखते हुए मंडप में ह्यूमिडिटी बढ़ाकर टेम्प्रेचर कंट्रोल करने की व्यवस्था की है। इसीलिए इस मंडप को 'एसी मंडप' नाम दिया। इसमें किसी भी सीजन में कोई भी सब्जी उगा सकते हैं।
प्राकृतिक खेती: कैसे करते हैं पंच संस्कार?
अश्विन नारिया गौमूत्र, गोबर, कंडे की राख, गाय का दूध और हल्दी का यूज करके लोगों को प्राकृतिक खेती करना सिखाते हैं। उसका अच्छा रिजल्ट भी मिल रहा है। कम लागत में ज्यादा उपज हो रही है। उपज की क्वालिटी अच्छी होती है तो मार्केटिंग भी आसान हो जाती है। 20 वर्ष से वह नेचुरल फॉर्मिंग कर रहे हैं और लोगों को प्राकृतिक खेती करना सिखा रहे हैं। पंच संस्कार से खेती करना फायदे का सौदा हो गया है। अश्विन नारिया कहते हैं कि भूमि, बीज, जल, वायु और वनस्पति संस्कार करते हैं। इसका उपज पर अच्छा असर पड़ता है।
भूमि संस्कार
अश्विन कहते हैं कि खेती शुरु करने से पहले जमीन तैयार की जाती है। पहले खेत के चारो और नीम, जामुन, आम जैसे बड़े पेड़ लगाए जाते हैं। खेत के बॉर्डर पर पेड़ लगने से टेम्प्रेचर कंट्रोल हुआ। अब भूमि में नेचरल फॉर्म में उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हर एकड़ में 10 लीटर कैस्टर ऑयल और 50 लीटर गोमूत्र के साथ गाय के गोबर से बने कंडे की राख डालते हैं। उनका कहना है कि कंडे की राख से आक्सीजन लेबल बढ़ता है।
बीज संस्कार
खेत में बीज डालने से पहले उसका भी संस्कार किया जाता है। इसके लिए गाय का गोबर और दूध, गौमूत्र, चूना और हल्दी और गाय के दूध से एक मिश्रण तैयार किया जाता है। उसमें बीज को 24 घंटे के लिए भिगोया जाता है। उसके बाद बुआई की जाती है।
जल संस्कार
खेत में जिस जल से सिंचाई की जाती है। उसका भी संस्कार किया जाता है। गाय के गोबर का भस्म और कुश की घास का यूज पानी चार्ज करने के लिए किया जाता है।
वनस्पति संस्कार
फसलों को कीट और रोगों से बचाने के लिए गौ मूत्र, गुड़ के मिश्रण का छिड़काव किया जाता है। कुछ वनस्पतियों से पेस्टीसाइड भी बनाकर यूज किया जाता है, जो कीटनाशक का काम करते हैं।
वायु संस्कार
अश्विन कहते हैं कि दूषित हवा का असर खेती पर भी पड़ता है। इसके लिए हवन किया जाता है। उसमें गाय के गोबर से बने उपले, शुद्ध घी और शास्त्रों में बताए गए नौ ग्रहों से संबंधित लकड़ियों का उपयोग होता है। माना जाता है कि घी के हवन से 108 किस्म की गैस निकलती है, जो वातावरण में मौजूद जीवाणुओं को खत्म करती हैं। वह कहते हैं कि लोग फलों पर वैक्स की कोटिंग करते हैं। पर हवन से खेतों में ही फलों पर नेचुरल कोटिंग हो जाती है।
पुर्तगाल और अफ्रीकन कंट्री में सिखाई नेचुरल फॉर्मिंग
अश्विन नारिया कहते हैं कि बीते साल 8 महीने पुर्तगाल में था। लोगों को फाइव लेयर मंडप फॉर्मिंग के बारे में बताया। अफ्रीकन कंट्री में भी नेचुरल फॉर्मिंग सिखाई। विदेशों में गए भारतीयों को इंडियन वेजिटेबल नहीं मिलता है। मंडप फार्मिंग उनके लिए बागवानी आसान बना रहा है।
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