
लखनऊ। यूपी कैडर की तेज तर्रार आईएएस अफसर किंजल सिंह के परिवार की कहानी बहुत ही दर्दनाक है। आज उनके काम से अपराधियों के पसीने छूटते हैं। एक समय ऐसा भी था, जब उनकी राह में बड़ी मुश्किलें थी। पर किंजल सिंह ने हार नहीं मानी। सभी बाधाओं को परास्त कर यूपीएससी एग्जाम क्लियर कर आईएएस बनीं। आइए उनके बारे में जानते हैं।
डीएसपी पिता की 1982 में हो गई थी हत्या
आईएएस किंजल सिंह के पिता केपी सिंह यूपी पुलिस में डीएसपी थे। साल 1982 में उनका मर्डर हो गया था। तब किंजल सिंह की उम्र महज 6 महीने थी। उनकी मां अपनी फूल सी बच्ची को लेकर बलिया से दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट तक जाती थीं। पूरा दिन अदालत में पति को न्याय दिलाने के काम में लगी रहती और रात में फिर बलिया वापस लौट जाती। बचपन से ही किंजल सिंह मां के साथ न्याय के सफर में साथ रहीं।
31 साल बाद पिता को मिला न्याय
आईएएस किंजल सिंह की मां विभा सिंह का न्याय के लिए यह स्ट्रगल लगातार चलता रहा। 31 साल बाद उन्हें न्याय मिला। लखनऊ की विशेष अदालत ने 5 जून, 2013 को तत्कालीन डीएसपी केपी सिंह की हत्या के आरोप में 18 पुलिसवालों को दोषी ठहराया। हालांकि फैसले के वक्त किंजल सिंह आईएएस बन चुकी थीं और यूपी के बहराइच जिले में बतौर डीएम तैनात थीं।
यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे केपी सिंह
दरअसल, किंजल सिंह के पिता केपी सिंह खुद आईएएस की तैयारी कर रहे थे। उनके मर्डर के कुछ दिन बाद यूपीएससी के नतीजे आएं तो पता चला कि उन्होंने मुख्य परीक्षा पास कर ली थी। उनकी बेटियों ने पिता का सपना पूरा करने की ठानी। हालांकि जब यह बात उनकी मां कहती थीं तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे।
साल 2004 में कैंसर से मां की मौत
किंजल सिंह ने दिल्ली यूनिर्वसिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें पता चला कि मां को कैंसर हो गया है। एक तरफ पढ़ाई दूसरी तरफ मां के असाध्य रोग का इलाज कराना आसान नहीं था। विभा सिंह की कई राउंड कीमोथैरेपी हुई। पर उनकी सेहत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बावजूद अंतिम समय तक उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इन्हीं सब स्थितियों के बीच साल 2004 में उनकी मौत हो गई। हालांकि किंजल सिंह ने अपने पिता को न्याय दिलाने की ठान ली थी।
साल 2008 में बनीं आईएएस
किंजल सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप किया और अपनी यूपीएससी की तैयारी पर ध्यान दिया। मां की मौत के बाद अपनी छोटी बहन प्रांजल को भी दिल्ली बुला लिया और दोनों बहनें यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। साल 2008 के यूपीएससी के दूसरे प्रयास में किंजल सिंह आईएएस बनीं। उसी साल प्रांजल को भी आईआरएस कैडर मिला।
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