अयोध्या की बेटी का कमाल: बिना कोचिंग बनी UPSC टॉपर, IAS-IPS की नौकरी ठुकरा चुनी ये राह

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Nov 05, 2024, 09:42 AM IST
अयोध्या की बेटी का कमाल: बिना कोचिंग बनी UPSC टॉपर, IAS-IPS की नौकरी ठुकरा चुनी ये राह

सार

UPSC Success Story: अयोध्या की विदुषी सिंह ने बिना कोचिंग के पहले प्रयास में UPSC में 13वीं रैंक पाई और IAS-IPS का ऑफर ठुकरा कर IFS चुना। 

UPSC Success Story in Hindi: राजस्थान के जोधपुर में जन्मी विदुषी सिंह का परिवार अयोध्या से ताल्लुक रखता है। भले ही वह साधारण परिवार में पैदा हुईं, पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की ठानी थी। इसके लिए हार्ड वर्क का रास्ता चुना। फैमिली बैकग्राउंड ऐसा था, जिसमें एजूकेशन को अहमियत दी जाती थी। 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर इतिहास रच दिया। आईएएस और आईपीएस की नौकरी के बजाए आईएफएस सर्विस चुनी। उनकी कहानी यूथ के लिए इंस्पिरेशनल है। 

एनसीईआरटी की किताबों से तैयारी 

यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा क्रैक करने के लिए अधिकतर छात्र कोचिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन विदुषी सिंह ने इस धारणा को बदल दिया। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने दम पर तैयारी की। कॉलेज के दिनों से ही एनसीईआरटी की किताबों से तैयारी शुरू कर दी थी। रेगुलर पढ़ाई करती रहीं।

पहले प्रयास में 13वीं रैंक

विदुषी सिंह ने पहले प्रयास में ही यूपीएससी में 13वीं रैंक हासिल की। वैकल्पिक विषय के रूप में अर्थशास्त्र चुना था, यह उनके इंटरेस्ट का सब्जेक्ट था। मतलब यह कि विदुषी ने अपने इंटरेस्ट और समझ को ध्यान में रखते हुए तैयारी की स्ट्रेटजी बनाई थी। यूपीएससी में टॉप रैंक पाने के बाद उनके पास IAS और IPS सर्विस में जाने का मौका था, लेकिन उन्होंने IFS (भारतीय विदेश सेवा) चुना। वह एक इंटरव्यू में बताती हैं कि भारतीय विदेश सेवा में जाना उनके दादा-दादी का सपना था। वे चाहते थे कि उनका परिवार देश का नाम विदेशों में रोशन करे। उन्होंने अपने दादा-दादी का सपना साकार किया है।

टेस्ट सीरीज और मॉक टेस्ट दिए

विदुषी ने बिना किसी कोचिंग तैयारी के लिए अपनी खुद की योजना बनाई और टेस्ट सीरीज और मॉक टेस्ट दिए। एनसीईआरटी की किताबों से बेसिक्स को मजबूत किया।रोजाना पढ़ाई के बाद खुद का मूल्यांकन किया। विदुषी सिंह का मानना है कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में कोचिंग से ज्यादा जरूरी है सेल्फ स्टडी। कोचिंग एक गाइड की तरह होती है, लेकिन असली मेहनत छात्र को खुद ही करनी होती है। उन्होंने अपने अनुभव से साबित किया कि यदि कोई छात्र रेगुलर पढ़ाई करता है तो वह किसी भी कठिन परीक्षा को पास कर सकता है।

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