रिस्क का रिटर्न: मोटी सैलरी को 'बाय-बाय'...शुरू किया ये बिजनेस, अब 4000 करोड़ के बिजनेस टायकून

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Nov 09, 2024, 11:19 AM ISTUpdated : Nov 09, 2024, 11:24 AM IST
रिस्क का रिटर्न: मोटी सैलरी को 'बाय-बाय'...शुरू किया ये बिजनेस, अब 4000 करोड़ के बिजनेस टायकून

सार

कैसे बेंगलुरु के उथम गौड़ा ने नौकरी छोड़कर बड़ा रिस्क लिया और शुरू किया कैप्टन फ्रेश, जो अब 4000 करोड़ की सीफूड कंपनी बन चुकी है। जानिए कैसे गौड़ा की स्ट्रेटजी ने उन्हें भारत के सबसे तेजी से बढ़ते बिजनेस टायकून में बदल दिया।

नई दिल्‍ली। बेंगलुरु के उथम गौड़ा ने 2019 में कैप्टन फ्रेश की शुरूआत की थी, जो अब भारत में सीफूड कारोबार की दुनिया का एक जाना पहचाना नाम है। सीफूड और मछली के प्रोटीन प्रोडक्ट्स सीधे किसानों से लेकर दुकानों तक पहुंचाने वाली इस कम्पनी को कम समय में बड़ी ग्रोथ मिली। यह उथम गौड़ा की सोच की वजह से संभव हो सका, क्योंकि सीफूड इंडस्ट्री में जॉब करते वक्त ही उन्होंने इस सेक्टर को अच्छे से समझ लिया था। वह यह जान गए थे कि इस फील्ड में कहां दिक्कते हैं और कहां अवसर? और उसी का फायदा उठाकर उथम गौड़ा ने चंद वर्षों में हजारो करोड़ की कम्पनी खड़ी कर दी। 

कैसे हुई शुरुआत?

उथम गौड़ा के करियर की शुरुआत बड़ी कंपनियों में हॉयर पोजिशन पर जॉब से हुई। नेक्कांती सीफूड्स लिमिटेड में एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ओ3 कैपिटल में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के रूप में काम किया। उन कम्पनियों में उन्हें मोटी सैलरी के साथ शानदार करियर भी मिल रहा था। एमबीए की डिग्री एस.पी. जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च से हासिल करने के बार उनका करियर ऊंचाई की तरफ जा रहा था। 

गौड़ा ने देखी-सीफूड इंडस्ट्री की समस्याएं

लेकिन गौड़ा ने देखा कि सीफूड इंडस्ट्री में सप्लाई चेन की समस्याए हैं। जिसकी वजह से कस्टमर्स तक फ्रेंश प्रोडक्ट नहीं पहुंच पा रहे थे। वह यह समझ गए थे कि यदि इस अव्यवस्थित यानी अन-ऑर्गनाइज्ड मार्केट को ऑर्गनाइज्ड कर दिया जाए तो अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। यहीं से उन्हें कैप्टन फ्रेश शुरू करने का आइडिया आया। आगे उन्होंने नौकरी छोड़ने का बड़ा रिस्क लिया।

हर दिन 100 टन मछली और 36 तरह के सीफूड की बिक्री

कैप्टन फ्रेश प्रोडक्ट की क्वालिटी का ख्याल रखती है। कंपनी हर दिन करीब 100 टन ताजा मछली और 36 से ज्यादा प्रकार के सीफूड बेचती है। 50 से अधिक कलेक्शन पॉइंटस के जरिए 2,500 से अधिक दुकानों तक फ्रेश प्रोडक्‍ट की डिलीवरी की जाती है। कैप्टन फ्रेश के काम की खास बात है कि ये कस्टमर्स को अगले दिन सुबह 6 बजे तक ताजा सीफूड की डिलीवरी पर फोकस रखता है। यह खासियत इसकी विश्वसनीयता को और बढ़ाती है। इससे प्रोडक्ट के खराब होने का खतरा कम होता है, जिससे निपटना सप्लाई चेन के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता है।

अमेरिका और यूरोप तक कारोबार फैलाने की योजना

कैप्टन फ्रेश ने कई फंडिंग राउंड्स में बड़ा इंवेस्टमेंट हासिल किया है, जिससे यह आज भारत में एक बड़ी सीफूड सप्लाई चेन कंपनी बन गई है। सीरीज सी राउंड में इसने 20 मिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त किया, जिससे कुल निवेश 125 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इस निवेश के साथ कंपनी ने अपना कारोबार अमेरिका और यूरोप तक फैलाने की योजना बनाई है। जून 2021 में, एक्सेल पार्टनर्स और मैट्रिक्स पार्टनर्स इंडिया की अगुवाई में सीरीज ए राउंड में कैप्टन फ्रेश ने 12 मिलियन डॉलर जुटाए थे, जिसमें अंकुर कैपिटल और इनक्यूबेट फंड भी शामिल थे। ।

रंग लाई गौड़ा की यह स्ट्रेटजी, कंपनी की वैल्यूशन 4,000 करोड़ से ज्यादा

गौड़ा का फोकस एक सिस्टमैटिक सप्लाई चेन तैयार करने पर था, जिसमें उन्होंने हर पहलू का ध्यान रखा। चाहे प्रोडक्ट की क्वालिटी की बात हो या फिर समय पर डिलीवरी की। एक ट्रांसपेरेंट सप्लाई चैनल का मॉडल बनाया। उनकी यह स्ट्रेटजी रंग लाई और कैप्टन फ्रेश हजारों करोड़ की कम्पनी बन गई। कंपनी की वैल्यूएशन आज 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो इसे भारत के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स में से एक बनाती है।

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