
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर मुलायम हो रही हैं। लोकसभा चुनाव में जिस तरह से मायावती ने भाजपा और पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आक्रामक मोर्चा खोला था। वहीं केन्द्र में सरकार बनने के बाद मायावती के रूख में जबरदस्त बदलाव आ रहे हैं। मायावती की क्या ऐसी मजबूरी है कि विरोधों के बावजूद वह मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक नहीं हो पा रही हैं। कहीं इसका कारण उनके भाई आंनद तो नहीं जो कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। या फिर मायावती को ये लग रहा है कि केन्द्र सरकार के खिलाफ जाकर उसे कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
असल में मायावती ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर केन्द्र सरकार को समर्थन दिया। ऐसा कर मायावती ने एक तीर से दो निशाने साधे। पहला तो इसके जरिए उसने केन्द्र सरकार से अपने रिश्तों को बेहतर बना लिया दूसरा अपने समर्थकों को माया समझाने में कामयाब रही कि दलितों के मसीहा डा. भीमराव आंबेडकर भी जम्मू कश्मीर में 370 लागू करने के पक्ष में नहीं थे। लिहाजा मायावती ने सरकार को समर्थन का फैसला किया।
यही नहीं मायावती पिछले दिनों मायावती ने केन्द्र सरकार आर्थिक नीतियों पर कहा कि केन्द्र सरकार आर्थिक सुधारों के लिए अच्छे प्रयास कर रही है। लेकिन ये प्रयास नाकाफी। इससे साफ होता है कि मायावती केन्द्र सरकार के प्रति अपने रूख को नरम कर रही हैं। यही नहीं मायावती को विपक्षी नेताओं के श्रीनगर दौरे पर भी ऐतराज जताया था। माया का कहना था कि बिना अनुमति वहां जाना ठीक नहीं था।
कई घोटालों की चल रही है जांच
मायावती के खिलाफ कई एजेंसियां जांच कर रही हैं। इसमें चीनी मिल घोटाला, स्मारक घोटाला और आय से अधिक संपत्ति का भी मामला है। लिहाजा इन घोटालों की आंच देर सवेर मायावती पर आ सकती है। हालांकि में आयकर विभाग ने मायावती के भाई और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद का अरबों रुपये का एक प्लाट नोएडा में सीज किया है। यही नहीं आनंत के खिलाफ कई एजेंसियां आय से अधिक संपत्ति और फर्जी कंपनी के मामले में जांच कर रही हैं।
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