'जजों की नियुक्ति में होता है परिवारवाद और जातिवाद', जज ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर लगाया आरोप

By Team MyNationFirst Published Jul 4, 2019, 7:51 AM IST
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जस्टिस रंगनाथ ने लिखा है 'न्यायपालिका वंशवाद और जातिवाद से ग्रसित है। जहां जजो के परिवार से होना ही अगला जज होना सुनिश्चित  करता है। अधीनस्थ न्यायलय (सबोर्डिनेट कोर्ट) के जजों को अपनी योग्यता सिद्ध करने पर चयनित होने का अवसर मिलता है। लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों की नियुक्ति का हमारे पास कोई निश्चत मापदंड नहीं है। केवल परिवारवाद और जतिवाद से ग्रसित नियुक्तियां की जाती हैं। 
 

इलाहाबाद:  हाईकोर्ट के जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों को नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि न्यायाधीशों की नियुक्तियों के लिए कोई निश्चित मापदंड नहीं है। उन्होंने जजों की नियुक्तियों को परिवारवाद और जातिवाद से ग्रसित बताया है। साथ ही न्यायपालिका की गरिमा को बरकरार रखने के लिए सख्त फैसले लेने की बात भी उन्होंने पत्र में कही है।

पत्र में क्या लिखा है ?

जस्टिस रंगनाथ ने लिखा है 'न्यायपालिका वंशवाद और जातिवाद से ग्रसित है। जहां जजो के परिवार से होना ही अगला जज होना सुनिश्चित  करता है। अधीनस्थ न्यायलय (सबोर्डिनेट कोर्ट) के जजों को अपनी योग्यता सिद्ध करने पर चयनित होने का अवसर मिलता है। लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों की नियुक्ति का हमारे पास कोई निश्चत मापदंड नहीं है। केवल परिवारवाद और जतिवाद से ग्रसित नियुक्तियां की जाती हैं। 

PM मोदी से सख्त कदम उठाने की मांग

जस्टिस पांडेय ने आगे लिखा है कि 34 साल के कार्यकाल में उन्हें कई बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों को देखने का अवसर मिला है। उनका कानूनी ज्ञान संतोषजनक नहीं है। वहीं जब सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक चयन आयोग की स्थापना करने की कोशिश की तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया था। जस्टिस पांडेय ने 20 साल के सुप्रीम कोर्ट के विवाद और अन्य मामलों का हवाला दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कठोर कदम उठाने की मांग भी की है।  
 

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