
नई दिल्ली/लखनऊ।
आगामी लोकसभा चुनाव राज्य में दिचचस्प होगा। राज्य में मुस्लिम वोटों में सेंधमारी के लिए दक्षिण भारत की पार्टी माने जाने वाली एआईएमआईएम राज्य में अपने प्रत्याशियों को उतारेगी। इस पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। लिहाजा राज्य में ओवैसी के उतरने से मुस्लिम वोटों का नुकसान सपा-बसपा गठबंधन को उठाना पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक ओवैसी अलीगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इसके लिए ओवैसी उत्तर प्रदेश में किसी छोटे दल से चुनाव के लिए गठबंधन कर सकते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम बाहुल्य सीट है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा ने जीत हासिल की थी। लिहाजा ओवैसी के उतरने से इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा। क्योंकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के अलीगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है।
सपा बसपा के बीच हुए गठबंधन में ये सीट सीट बीएसपी के खाते में है। ओवैसी की छवि एक कट्टर मुस्लिम नेता की है और उनकी पार्टी दक्षित भारत के आंध्र प्रदेश में सक्रिय है। ओवैसी हैदराबाद से सांसद हैं और महाराष्ट्र में भी उनकी पार्टी का एक विधायक है। ओवैसी के अलीगढ़ से उतरने की खबर से बसपा की मुश्किलें जरूर बढ़ जाएंगी क्योंकि अलीगढ़ में इससे मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण होगा।
राज्य में करीब 30 सीटें मुस्लिम बाहुल्य हैं और यहां पर भी ओवैसी के अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारने जाने की योजना है। ओवैसी खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर फोकस कर रहे हैं और सपा-बसपा गठबंधन के तहत यहां की ज्यादातर सीटें बसपा के खाते में आयी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी ओवैसी की पार्टी ने कुछ चुनींदा सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि उन्हें चुनाव में कोई सफलता हासिल नहीं हुई। लेकिन ओवैसी के मुस्लिम चेहरा होने के नाते उनकी रैलियों में भीड़ देखने को जरूर मिली।
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