सावधान, चुनाव के सीजन में छोटा सा सियासी सर्वे भी आपको कर सकता है 'कंगाल'!

By Shashank ShekharFirst Published Mar 31, 2019, 5:16 PM IST
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साइबर अपराधियों ने यूजर्स को फांसने वाले हमले करना शुरू कर दिया है। ऐसी कई फर्जी वेबसाइटें बन गई हैं, जो 2019 के आम चुनावों से जुड़ी नजर आती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य वोटर के ज्यादा से ज्यादा डाटा पर हाथ साफ करना है। 
 

क्या आप चुनावों को लेकर इंटरनेट पर काफी सक्रिय हैं? आगामी चुनावों से जुड़ी नवीनतम जानकारियों का पता लगाने के लिए बार-बार इंटरनेट खंगालते रहते हैं? आपको थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि आपकी उत्सुकता आपको किसी साइबर हमले का शिकार न बना दे। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर लोगों की दिलचस्पी में साइबर अपराधी अपने लिए संभावनाएं देख रहे हैं। चुनाव से संबंधित जानकारियां देने की आड़ में आपकी निजी जानकारियों पर हाथ साफ करने की फिराक में हैं। 

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, हैकर्स मतदाताओं का निजी डाटा चुराने के लिए नए-नए अवसर तलाश रहे हैं। अब जबकि लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू ही होने वाली है, इंटरनेट पर सियासी वार-पलटवार, उम्मीदवार और मतदाताओं से संबंधित सूचनाओं को सर्च करने की सुनामी आने वाली है। यह ऐसा अवसर है जिसमें साइबर अपराधी किसी की भी निजी सूचना पर हाथ फेर सकते हैं। 

साइबर अपराधियों ने यूजर्स को फांसने वाले हमले करना शुरू कर दिया है। ऐसी कई फर्जी वेबसाइटें बन गई हैं, जो 2019 के आम चुनावों से जुड़ी नजर आती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य वोटर के ज्यादा से ज्यादा डाटा पर हाथ साफ करना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह शुरुआती तौर पर कोई वित्तीय नुकसान नहीं करेगा लेकिन इससे किसी भी व्यक्ति की पहचान संबंधी जानकारियों चोरी होने और वित्तीय हमलों की संभावना बढ़ जाएगी। 

साइबर अपराध विशेषज्ञ अमित दुबे के अनुसार, ‘डाटा एक तरह से सोने की खान है। चुनावी सीजन हैकर्स के लिए संभावनाओं भरा है। चुनाव के समय में काफी हैकर्स सक्रिय हो जाता हैं। ये न केवल हजारों लोगों को निशाना बनाते हैं, बल्कि इन अवसरों से पैसा बनाने की फिराक में भी रहते हैं। यही वजह है कि चुनाव के दौरान साइबर अपराधों में इजाफा होने की काफी संभावना है।’

दुबे ने बताया, ऐसी कई संदिग्ध वेबसाइटें और एप चल रहे हैं, जो वोटरों को अपने पते में बदलाव करने, प्रत्याशियों और लोकसभा क्षेत्र के बारे में जानने के लिए कुछ ब्यौरा देने को कहते हैं। हैकर्स ऐसी स्थिति का लाभ लेने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 

इन चुनावों के महत्व का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2019 के आम चुनाव में 90 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दुनिया भर के दूसरे कोनों में बैठे लाखों लोग भी इन चुनावों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। भारत की अगली सरकार चुनने के लिए होने वाले इस चुनाव को सबसे बड़ा सियासी संग्राम कहा जा रहा है। 

भारत में चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होने से काफी  पहले चुनाव आयोग ने नगारियों को उनके नाम, नए रजिस्ट्रेशन, वोटर डिटेल में बदलाव अथवा वोटर आईडी कार्ड में सुधार के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाया था। देश के सभी जिलों में संपर्क केंद्र खोले गए थे। इसी मौके का लाभ उठाने के लिए साइबर अपराधियों ने भी कई प्लेटफॉर्म बनाए हैं। ये देखने में या तो राजनीतिक दलों या नेताओं से जुड़े लगते हैं या भी इन्हें लोगों का निजी डाटा चुराने के मकसद से तैयार किया जाता है। 

हैकर्स का काम करने का तरीका बेहद साधारण है। वे ऐप, वेबसाइट या कोई लिंक तैयार करते हैं, जिन्हें सर्वे के नाम पर भरना होता है। वोटर की पहचान के लिए उसमें अपना ब्यौरा भरने को अथवा किसी पार्टी को दान देने को कहा जाता है। लेकिन ऐसे साइटें चोरी से यूजर्स का डाटा हासिल कर रही होती हैं, ताकि उन्हें आगे बेचा जा सके। 

ये साइबर अपराधी वोटर्स की जेब को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं, इस बारे में एक अन्य साइबर विशेषज्ञ ईशान सिन्हा ने ‘माय नेशन’ को बताया, ‘मैंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां चुनाव संबंधी जानकारियों को दुरुपयोग किया गया है। सबसे दिलचस्प होता है सर्वे में हिस्सा लेने के नाम पर आपकी जानकारियां अथवा पैसों में सेंध लगाना। साइबर अपराधी ऐसा दिलचस्प सर्वे तैयार करते हैं जिनमें यूजर्स को पसंदीदा नेता, उसकी उम्र और कभी कभार एक रुपये दान करने के लिए लिंक क्लिक करना होता है, या एप डाउनलोड करना पड़ता है। लेकिन बैकएंड पर ये विश्वसनीय स्रोत अथवा राजनीतिक दल की ओर से तैयार ऐप आपके सभी डाटा पर हाथ साफ कर लेता है, इसमें कुछ भी दान करते हुए आपके क्रेडिट कार्ड की डिटेल हैकर्स तक पहुंच जाती है।’

सिन्हा के मुताबिक, किसी भी साइट पर भुगतान करते अथवा ब्यौरा देते समय उसका नाम और स्रोत प्लेटफॉर्म को जरूर चेक करना चाहिए। 

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