
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा ने एक मंत्री को दो लोकसभा क्षेत्रों का प्रभार दिया है। लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर ही मंत्री का भविष्य तय होगा। लिहाजा पार्टी के इस फैसले के बाद कैबिनेट मंत्रियों की धड़कने बढ़ गयी हैं।
भारतीय जनता पार्टी राज्य चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक में बड़ा फैसला क या है। इस फैसले के तहत योगी सरकार के एक मंत्री को सूबे में दो-दो लोकसभा क्षेत्रों का जिम्मा दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी की जीत और हार के आधार पर मंत्री का भविष्य तय होगा। अगर प्रत्याशी जीता तो मंत्री का आगे मंत्री रहना तय होगा नहीं तो हार के बाद मंत्री को भी अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा। पार्टी ने फैसला किया है कि सांसद-विधायकों, निगमों के चेयरमैन, बोर्ड के अध्यक्षों, सरकार के मंत्रियों को एक-एक महीने की तनख्वाह पार्टी फण्ड में देंगे।
प्रदेश प्रभारी जेपी नड्डा की अगुवाई में हुई बैठक में इस अहम फैसले के बाद मंत्रियों की दिलों की धड़कने तेज हो गयी हैं क्योंकि कई मंत्रियों से स्थानीय जनता नाराज है। नड्डा ने योगी सरकार के मंत्रियों के साथ बैठक कर लोकसभा क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से काम सौंपा। नड्डा ने मंत्रियों से कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं के साथ तय योजना व रचना पर काम करना होगा। गौरतलब है कि राज्य में सपा-बसपा का गठबंधन बनने के बाद भाजपा की दिक्कतें बढ़ गयी हैं।
पार्टी ने 2014 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 73 सीटें जीती थी। अब पार्टी पर इस प्रदर्शन को दोहराने का दबाव है। लेकिन गठबंधन के कारण भाजपा को नुकसान होने का अंदेशा है। लिहाजा पार्टी सभी तरह के विकल्पों को तलाश रही है। पार्टी करीब तीन दर्जन सांसदों का टिकट काट सकती है। क्योंकि पार्टी हाई कमान के पास जो रिपोर्ट आयी है। उसके मुताबिक करीब तीन दर्जन सीटों पर सांसदों को लेकर जनता काफी नाराज है।
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