
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा राजस्थान में संगठन में बदलाव करेगी। ये बदलाव राज्य में पीएम की रैली से पहले किए जाने की उम्मीद की जा रही है। इसके जरिए भाजपा जातीय समीकरणों को साधना चाहती है। राज्य में विधानसभा चुनान में मिली हार के बाद संगठन में बदलाव की मांग की जा रही है।
असल में आगामी लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा संगठन के साथ ही कई जिलों में जातीय समीकरण साधने के लिए बदलाव करने जा रही है। हालांकि राज्य में चुनाव हारने के बाद भाजपा ने ये कोशिश कर दी थी। लेकिन अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। संगठन में बदलाव के लिए कोई दखल न हो, इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। यही नहीं विधानसभा में विपक्ष का नेता भी राजे के किसी करीबी को नहीं बनाया गया है।
लेकिन अब भाजपा जिला संगठनों में और बदलाव करने जा रही है। आगामी 10 फरवरी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के जयपुर दौरे से पहले करीब 8 से 10 जिला अध्यक्ष और बदले जाएंगे। जिलाध्यक्षों को बदलने के अलावा पार्टी अपने संगठनात्मक जिलों की संख्या भी बढ़ाने पर विचार कर रही है। हाल ही में संगठन को और ज्यादा मजबूत करने के लिए जयपुर को दो से बढ़ाकर तीन जिलों में बांटा जा चुका है।
वहीं ऐसा माना जा रहा है कि बाड़मेर व अलवर को शहर तथा ग्रामीण में बांटा जा सकता है। ताकि ज्यादा से ज्यादा नेताओं को दायित्व दिया जा सके। इन दोनों जिलों का क्षेत्रफल संगठन के लिहाज से काफी बड़ा है । विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ही पार्टी में मौजूदा जिलाध्यक्षों को बदलने की मांग संगठन में की जा रही थी।
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