
न्यूज डेस्क। भारत चंद्रमा की दहलीज पर खड़ा है। चंद्रयान-3 (Chadrayaan-3) चांद पर लैंडिंग करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। चंद्रमा की साउथ पोल पर करते ही भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा। स्पेसक्राफ्ट का लैंडर-रोवर चांद पर एक दिन तक काम करेगा तो भारत के 14 दिन के समान है। ISRO के महत्वकांक्षी मिशन से हर हिंदुस्तानी की उम्मीदें जुड़ी हैं। चंद्रयान-3 के लिए जाति-मजहब से उपर उठकर हर भारतवासी प्रार्थना कर रहा है। मंदिरों में पूजा हो रही है तो मस्जिदों में दुआ मांगी जा रही है। भारत के साथ पूरा विश्वस उत्साहित है। ऐसे में आपके में चंद्रयान जुड़े कुछ सवाल कि लैंड होने के बाद ये क्या करेगा? चंद्रयान-3 का बजट क्या है? चंद्रयान-3 से जुड़े कुछ सवालों के जवाब आज हम देंगे।
कितना हैं चंद्रयान-3 का बजट ?
चंद्रयान-3 मिशन का टोटल बजट 615 करोड़ रुपए है। धरती से चांद की दूरी, 3,84,000 KM है। यानी चंद्रयान पर हर एक KM में करीब 16 हजार रुपए खर्च ह रहे हैं। ये बजट कई बड़ी फिल्मों से भी कम है। चंद्रयान के लैंडर रोवर और प्रपल्शन मॉड्यूल को तैयार करने पर कुल 250 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि लांच सर्विस सहित दूसरे कामों पर 365 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 पर आया खर्च इससे पहले के मिशन पर हुए खर्चे से भी 363 करोड़ रुपये कम है। भारत के चंद्रयान-2 मिशन पर करीब 978 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
साउथ पोल पर ही क्यों लैंडिंग चाहता है भारत ?
चांद के पोलर रीजर दूसरे ग्रहों के मुताबिक काफी अलग हैं। यहां पर ऐसे कई हिस्से मौजूद हैं जहां सूरज की रौशनी नहीं पहुंचती और तापमान -200 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। वैज्ञानिकों का अनुान ह,यहां बर्फ के फॉर्म में पानी मिल सकता है। बता दें, चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की सतह पर पानी की मौजूदगी का सकेंत दिया था।
कितनी स्पीड से लैंड करेगा चंद्रयान-3?
चंद्रयान-3 के लिए आखिरी 17 मिनट अहम होंगे। लैंडर विक्रम 25 kM की ऊंचाई से चांद पर उतरने की कोशिश करेगा। इस वक्त स्पीड 1.7 किलोमीटर प्रति सेकंड है। अगर स्टेज तक पहुंचने में उसे करीब 11.5 मिनट लगेगा। वहीं धीरे-धीरे 800 से 150 मीटर की ऊंचाई के बीच लैंडर के सेंसर्स चांद की सतह पर लेजर किरणें डालकर लैंडिंग के लिए सही जगह खोजेंगे। 60 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर की स्पीड 40 मीटर प्रति सेकेंड रहेगी। 10 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर की स्पीड 10 मीटर प्रति सेकेंड रहेगी। वहीं चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान लैंडिंग की स्पीड 1.68 मीटर प्रति सेकेंड होगी।
क्या करेंगे लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर ?
विक्रम लैंडर में चार पेलोड्स लगे हैं। पहला रंभा (RAMBHA)ये चांद की सतह पर सूरज से आने वाले प्लाजमा कणों की जांच करेगा। दूसरा चास्टे ( Chaste) ये चांद की सतह के तापमान की जांच करेगा। तीसरा है इल्सा (ILSA) यह लैंडिंग साइट के आसपास भूकंप गतिविधियों की जांत करेगा। चौथा लेजर रेट्रोरिप्लेक्टर एरे (LRA)ये चांद की डायनेमिक्स को समझने की कोशिश करेगा। वहीं Vikram Lander चंद्रमा की सतह पर प्रज्ञान रोवल से मैजेस लेगा और इसरो के बंगलुरू स्थित ऑफिस में भेजेगा। जरुरत पड़ी तो प्रोपल्शन मॉड्यूल और चंद्रयान-3 के ऑर्बिटर की मदद ली जाएगी।
चंद्रयान-3 में किस तरह के फ्यूल का इस्तेमाल ?
चंद्रयान-3 में फ्यूल के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन का यूज किया है। ये दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा लिक्विड है। इसका तापमान 252.8 डिग्री सेल्सियस होता है। चंद्रयान-3 में इसी का यूज किया गया है।
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