मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर की यह विशेष मांग

Published : Jun 24, 2019, 07:28 AM IST
मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर की यह विशेष मांग

सार

देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एस.एन शुक्ला को उनके पद से बर्खास्त करने की अपील की है।   

नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएन शुक्ला को हटाने की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शुक्ला को आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार में कदाचार का दोषी पाया गया है। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री से उन्हें हटाए जाने की कार्यवाही शुरु करने का अनुरोध किया है। 

जनवरी 2018 में तीन सदस्यीय आंतरिक समिति ने यह रिपोर्ट दी थी कि जस्टिस शुक्ला के खिलाफ गंभीर कदाचार के सबूत मौजूद हैं, जो कि उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं। 

इस समिति में मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसके अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीके जायसवाल शामिल थे।

इन तीनों की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई शुरु करने का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि 'जस्टिस शुक्ला के खिलाफ आंतरिक जांच समिति ने गंभीर आरोप पाए हैं जो उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं, उन्हें किसी भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इन परिस्थितियों में आपसे आग्रह है कि आगे की कार्रवाई पर विचार करें।'

मुख्य न्यायाधीश के पीएम मोदी को लिखे इस पत्र के बाद प्रक्रिया के मुताबिक राज्यसभा के सभापति यानी उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से विचार-विमर्श कर तीन सदस्यीय एक जांच समिति नियुक्त करेंगे। यह समिति भ्रष्टाचार के साक्ष्यों और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अपनी राय देगी कि न्यायाधीश को हटाने के लिए ऊपरी सदन में बहस की जाए या नहीं। 

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एसएन शुक्ला हाईकोर्ट में एक खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे, जब उन्होंने शीर्ष न्यायालय के आदेशों का कथित उल्लंघन करते हुए निजी कॉलेजों को 2017-18 के शैक्षणिक सत्र में छात्रों को नामांकन देने की अनुमति दी। 

जांच समिति की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति शुक्ला ने यह फैसला देते हुए 'न्यायिक मूल्यों को खत्म किया, एक न्यायाधीश के मुताबिक आचरण नहीं किया', 'अपने पद की गरिमा, मर्यादा और विश्वसनीयता को' कमतर किया और पद की शपथ का उल्लंघन किया। 

यह रिपोर्ट आने के बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने प्रक्रिया के मुताबिक न्यायमूर्ति शुक्ला को सलाह दी थी कि या तो वह इस्तीफा दे दें या अपनी इच्छा से रिटायरमेंट ले लें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि तत्काल प्रभाव से उन्हें न्यायिक कार्य से हटा दिया जाए जिसके बाद जस्टिस शुक्ला लंबी छुट्टी पर चले गए। 
 

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