
नई दिल्ली।
जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और आंतकी मसूद अजहर को वैश्विक आंतकी घोषित करने को लेकर चीन द्वारा अड़ंगा लगाए जाने के बाद अब चीन ने भारत के कड़े रूख के बाद यू टर्न लिया है। चीन ने कहा कि मसूद के वैश्विक आंतकी घोषित करने के लिए चल रही जांच में थोड़ा समय और लगेगा। चीन के रूख पर भारत और अमेरिका समेत कई देशों ने नाराजगी जताई थी।
चीन के रूख के बाद भारत और अमेरिका ने कड़ा ऐतराज जताया था। अमेरिका ने कहा था कि आंतकवाद से लड़ाई सबकी है। ये किसी अकेले देश की नहीं है। जबकि चीन द्वारा चौथी बार मसूद को बचाने के लिए उसकी कड़ी आलोचना की थी। उधर चीन के विरोध में आज से ही चीनी वस्तुओं का विरोध शुरू हो गया है। भारत में विरोध के कारण कारोबारियों ने चीनी सामान को आयात करने का विरोध किया है। लिहाजा इससे खतरा भांपते हुए चीन ने यू टर्न लिया है। चीन का कहना है कि जांच के लिए चाहिए और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी के तौर पर सूचीबद्ध करने के लिए उसे गहराई से जांच करने के लिए और समय चाहिए।
चीन ने लगातार गुरुवार को चौथी बार भारत को झटका देते हुए आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया। भारत मसूद अजहर को पिछले दस साल से वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग कर रहा है और हर बार चीन वीटो का इस्तेमाल कर पाकिस्तान की मदद करता है और मसूद को बचाने में कामयाब हो जाता है। लेकिन इस बार चीन के विरोध में भारत अमेरिका ही नहीं यूएन के अन्य देश भी हैं। क्योंकि यूएन में ये प्रस्ताव भारत ने नहीं बल्कि फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा लाया गया था।
असल में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति से मौलाना मसूद अजहर पर हर तरह के प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। अगर ये प्रस्ताव पारित हो जाता तो आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर हथियारों के व्यापार और वैश्विक यात्रा से जुड़े प्रतिबंध लगाया जा सकता था और उसकी परिसंपत्तियां भी ज़ब्त हो जाती। लेकिन मसूद पर प्रतिबंध से पाकिस्तान की सच्चाई दुनिया के सामने आ जाती।
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