
मुंबई। राज्य में सरकार बनने को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के मुताबिक राज्य में सरकार बनाने को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के बीच कॉमन मिएननिमम प्रोग्राम पर सहमति बन गई है। जिसकी अब शिवसेना के साथ बातचीत की जाएगी। लेकिन सीएमपी बन जाने के बावजूद अभी तक सरकार बनाने को लेकर शिवसेना जादुई आकंड़े से बहुत दूर है।
महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर कोई दल खुलकर नहीं बोल रहा है। लेकिन शिवसेना दावा कर रही है कि वह राज्य में सरकार बनाएगी और राज्य में पहली बार ठाकरे परिवार से कोई सीएम बनेगा। जिसका सपना राज्य में पार्टी के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे ने देखा था। लेकिन अभी तक शिवसेना के पास वह जादुई आंकड़ा नहीं है। जिसके बलबूते वह राज्य में सरकार बना सकती है। राज्य में सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की जरूरत है। जबकि शिवसेना के पास महज 56 विधायक है। वहीं कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना को समर्थन देना की बात कर रही है। लेकिन अभी तक इन दोनों दलों ने शिवसेना को समर्थन की चिट्ठी नहीं सौंपी है। लेकिन महाराष्ट्र को लेकर राजनीति चरम पर है।
दिल्ली से लेकर मुंबई तक कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं की बैठकें जारी है। वहीं कुछ नेताओं का कहना कि सोनिया ने सरकार गठन के लिए अपनी सहमति दे दी है। लेकिन कुछ नेताओं के दावे हैं कि कांग्रेस शिवसेना को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं है। लेकिन राज्य के ज्यादातर कांग्रेस के विधायक सरकार में शामिल होने के पक्ष में हैं। क्योंकि विधायकों का कहना है कि पार्टी अगर सरकार में शामिल नहीं होती तो इससे पार्टी को नुकसान होगा।
जबकि पार्टी आलाकमान को लग रहा है कि शिवसेना के साथ जाने से पार्टी का अल्पसंख्यक वोट बैंक उससे नाराज होगा। जिसका खामियाजा पार्टी को राज्य के साथ ही अन्य राज्यों में भी उठाना होगा। फिलहाल सीएमपी भी फाइनल हो गया है। इस पर अब महज मुहर लगने की देर है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को मुंबई में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की बैठक होगी, जिसके बाद गठबंधन का ऐलान किया जा सकता है।
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