महाराष्ट्र में कांग्रेस को चाहिए सत्ता में भागीदारी लेकिन तवज्जो नहीं दे रहे हैं उद्धव

Published : Jun 15, 2020, 11:01 AM IST
महाराष्ट्र में कांग्रेस को चाहिए सत्ता में भागीदारी लेकिन तवज्जो नहीं दे रहे हैं उद्धव

सार

पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य की शिवसेना सरकार को लेकर कटाक्ष किया और फिर उसके बाद कैबिनेट मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने उसी बात को दोहराया जो राहुल गांधी ने सरकार को लेकर कही थी। लेकिन अब कैबिनेट मंत्री और राज्य के कद्दावर नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार कांग्रेस के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

मुंबई। महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में दरारें दिखनी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि सत्ता में सहयोगी होने के बावजूद राज्य सरकार कांग्रेस से सौतेला व्यवहार कर रही है।  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस ने शिवसेना के साथ गठबंधन बनाया था और इसके कांग्रेस की कमजोरी न समझा जाए।


पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य की शिवसेना सरकार को लेकर कटाक्ष किया और फिर उसके बाद कैबिनेट मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने उसी बात को दोहराया जो राहुल गांधी ने सरकार को लेकर कही थी। लेकिन अब कैबिनेट मंत्री और राज्य के कद्दावर नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि  राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार कांग्रेस के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।  क्योंकि पार्टी को राज्य में लिए जाने वाले अहम फैसलों में शामिल नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा िक गठबंधन सरकार में  कांग्रेस को उचित हिस्सा और सम्मान नहीं मिल रहा है। इसकी जानकारी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को दे दी गई है। राज्य में ठाकरे सरकार कांग्रेस पर निर्भर है। लेकिन उसके बावजूद उसे सत्ता में भागीदार नहीं माना जाता है।

अशोक चव्हाण ने कहा कि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस ने शिवसेना को समर्थन दिया था और उसे पार्टी की कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठाकरे सरकार में कांग्रेस के मंत्रियों की आवाज नहीं सुनी जाती है और मुझे पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री कांग्रेस के सभी मुद्दों को अपने स्तर से देखेंगे और निस्तारण करेंगे। उन्होंने कह कि राज्यसभा चुनावों के दौरान, एनसीपी ने अपने दूसरे उम्मीदवार फौजिया खान को पार्टी से परामर्श किए बिना मैदान में उतारा।

वहीं जब महाराष्ट्र राज्य विधान परिषद की नौ सीटें थीं, तो तीनों दलों में से प्रत्येक दो उम्मीदवारों को मैदान में उतार सकती थी लेकिन कांग्रेस को केवल एक उम्मीदवार की मैदान में उतराने के लिए मजबूर किया गया। वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने कहा कि यह सच है कि उनके मंत्री सरकार से नाखुश हैं, लेकिन वे अभी तक सरकार से समर्थन वापस नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इन सभी मुद्दों का समाधान करेंगे।
 

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