
पंजाब में कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लड़ाई चरम में पहुंच गयी है। कैप्टन ने आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में साफ कह दिया है कि पंजाब में पार्टी को हार सिद्धू की वजह से मिली है। कैप्टन ने सिद्धू को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
पिछले दस दिन से राज्य में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद बना हुआ है। सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर कुछ दिन पहले तक कैप्टन के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे थे। हालांकि पहले कैप्टन शांत रहे, लेकिन उसके बाद उन्होंने उन दोनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सिद्धू की पत्नी ने आरोप लगाया कि कैप्टन के कारण ही उनका लोकसभा का टिकट काटा गया।
जबकि सिद्धू ने पत्नी का साथ देते हुए कहा कि उनकी पत्नी झूठ नहीं बोलती है। इसके बाद कैप्टन ने सिद्धू पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्धू मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और उनकी महत्वाकांक्षा काफी ज्यादा हैं। इसके बाद कैप्टन ने कहा कि सिद्धू ने जो उनके खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर बयान दिए हैं वह अनुशासनहीनता के दायरे में आते हैं।
लिहाजा उनके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। लेकिन राज्य प्रभारी आशा कुमारी ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी आलाकमान को दी है। चुनाव परिणाम के बाद इस पर फैसला होगा। आज कैप्टन ने सीडब्लूसी की बैठक में हिस्सा लिया। जहां उन्होंने साफ कहा कि सिद्धू के कारण राज्य में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। राज्य में कांग्रेस ने आठ सीटें जीती हैं।
अब पार्टी को तय करना है कि वह किसे रखना चाहती है। उन्होंने साफ कह दिया है कि पार्टी को उनमें या सिद्धू में से किसी एक को चुनना होगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सिद्धू के पास स्थानीय निकाय का विभाग है और वह अपने विभाग के संभाल नहीं पा रहे हैं। जिसके कारण कांग्रेस शहरी इलाकों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। हालांकिं कांग्रेस ने ग्रामीण हिस्सों में अच्छा प्रदर्शन किया है।
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