
-विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस को मिली कम सीटें
मध्य प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है कांग्रेस, ईवीएम के मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है। कांग्रेस ने कहा कि वह राज्य में ईवीएम की फारेंसिक जांच कराएगी। कांग्रेस का तर्क है कि राज्य के विंध्य क्षेत्र में उसे कम सीटें मिली हैं। लिहाजा ईवीएम की जांच कराकर वह सच्चाई सबके सामने लाएगी।
राज्य में नए मुख्यमंत्री की शपथ लेने जा रहे कमलनाथ ने कहा कि सरकार बनने के बाद वह ईवीएम की फारेंसिक जांच कराएगी। उन्हें शक है कि ईवीएम में गड़बड़ियां की गयी हैं। लिहाजा इस क्षेत्र की ईवीएम मशीनों की जांच कराने की जरूरत है। असल में राज्य की सत्ता पर 15 साल के बाद वापसी कर रही कांग्रेस ने विंध्य क्षेत्र में सबसे खराब प्रदर्शन किया है। यहां पार्टी को 30 में महज 6 सीटें मिली हैं जबकि भाजपा के खाते में 24 सीटें आयी। सबसे चौकाने वाली बात ये है कि इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के दिग्गज भी चुनाव हार गए हैं।
जिनमें निवर्तमान मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता अजय सिंह (अपनी परंपरागत चुरहट सीट) एवं प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह (अमरपाटन सीट) से भाजपा से चुनाव हारे हैं। प्रदेश के विंध्य इलाके में सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली और अनूपपुर जिले आते हैं। इस बार 6 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस ने 2013 के चुनाव में यहां पर 12 सीटें जीती थी। कमलनाथ ने कहना है कि विधानसभा चुनाव में इस बार बहुमत के नजदीक आने के बावजूद हमारा ईवीएम पर विंध्य इलाके में शक बरकरार है।
उन्होंने कहा कि हमने इस क्षेत्र की वोटिंग एवं परिणाम पर एक फोरेंसिक स्टडी की पहल की है। जो कि वोटिंग पर एक्जिट पोल की तरह सर्वे करेगा। कमलनाथ ने कहा कि मेरे पास विंध्य से कार्यकर्ता आए थे और कह रहे थे कि गांव ने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया जबकि मशीन से अलग परिणाम निकले। लिहाजा इसकी फोरेंसिक स्टडी की जरूरत है।
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