सांसदों की सेलरी पर कोरोना का कहर, जानें कितने फीसदी कटेगी सांसदों की तनख्वाह

Published : Apr 06, 2020, 06:10 PM ISTUpdated : Apr 07, 2020, 11:06 AM IST
सांसदों की सेलरी पर कोरोना का कहर, जानें कितने फीसदी कटेगी सांसदों की तनख्वाह

सार

कोरोना संक्रमण देश में तेजी से फैल रहा है और इसके कारण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है।  लिहाजा केन्द्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच सांसदों के वेतन में कटौती करने का फैसला किया है।  केन्द्र सरकार के इस फैसले की जानकारी केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने दी।

नई दिल्ली। कोरोना का कहर आम लोगों के साथ ही सांसदों की सेलरी पर भी देखा जा रहा है। क्योंकि केन्द्र सरकार ने सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती करने का फैसला किया है। ये कटौती एक साल तक रहेगी। इसके लिए केन्द्र सरकार ने एक आदेश पारिरत किया है जिसके बाद ये लागू हो जाएगा और सांसदों को 30 फीसदी कम वेतन मिलेगा।

कोरोना संक्रमण देश में तेजी से फैल रहा है और इसके कारण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है।  लिहाजा केन्द्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच सांसदों के वेतन में कटौती करने का फैसला किया है। केन्द्र सरकार सांसदों की तीस फीसदी सेलरी काटेगी। केन्द्र सरकार के इस फैसले की जानकारी केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने दी। उन्होंने बताया है कि पीएम नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में एक ऑर्डिनेंस पास किया है जिसके तहत सभी सांसदों की सैलरी 30 फीसदी काटी जाएगी।

इसके साथ ही कैबिनेट ने मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट लोक एरिया डेवलपमेंट  स्कीम यानी एमपीलैड को दो साल के लिए टाल दिया है। असल में इस स्कीम में जो धन मिलता था वह सांसद अपने क्षेत्र के विकास के लिए करते थे।  लेकिन अब ये दो साल के लिए रोक दिया गया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक एमपीलैड फंड में से 10 करोड़ रुपए को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कंसॉलिडेट फंड में डाला जाएगा।  केन्द्र सरकार ने इसके साथ ही सभी राज्यों के राज्यपाल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपि के वेतन में भी कटौती करने का फैसला किया है और इनके वेतन  में 30 फीसदी की कटौती की गई है।


आज लॉकडाउन का 13 वां दिन

आज लॉकडाउन का 13 वां दिन है और केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय ने कहा है कि भारत में इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं देश में चार हजार से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडू और दिल्ली के  हालात काफी खराब हैं।
 

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