जेएनयू देशद्रोह मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी को किया तलब

Published : Mar 11, 2019, 05:38 PM IST
जेएनयू देशद्रोह मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी को किया तलब

सार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगाने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने डीसीपी को तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने कहा कि अभी आरोप पत्र पर सेंशन नही मिला है, और सेंशन मिलने में 2 से 3 महीने का समय लग सकता है। जिसपर कोर्ट ने आदेश दिया कि डीसीपी इस मामले में अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। 

चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अधिकारी का एक्सीडेंट हो गया है। अब 29 मार्च को कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी से पूछा था कि क्या कन्हैया नारे लगा रहा था जिसपर जांच अधिकारी ने कहा जब नारे लग रहे थे, उस समय वहां मौजूद था। खालिद ने प्रोग्राम को ऑर्गनाइज किया था। अर्निबान भट्टाचार्य भी वहां मौजूद था। दो घंटे तक प्रोग्राम चला था। खालिद और अर्निबान का मेल भी मौजूद है। 

कोर्ट ने कहा प्रोग्राम से संबंधित वीडियो देखने के बाद आगे का फैसला तय करेंगे। लेकिन कोर्ट ने इस मामले से संबंधित वीडियो नही देखा। कोर्ट ने कहा था कि आरोप पत्र दाखिल करने में 3 साल आपने लगाया और सेंशन देने में दिल्ली सरकार 3 साल लगाएगे।  

आरोप पत्र में कन्हैया कुमार, अर्निबान भट्टाचार्य, खालिद उमर सहित 10 लोगो के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया गया है, जिसमें 7 कश्मीरी छात्र आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईया रसूल, बशीर भट, बशरत के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। 

वहीं आरोप पत्र की कॉलम संख्या 12 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा की बेटी अपराजिता, जेएनयूएसयू की तत्कालीन उपाध्यक्ष शहला राशिद, राम नागा, आशुतोष कुमार और बनोज्योत्सना लाहिरी सहित कम से कम 36 अन्य लोगों के नाम है, क्योंकि इन लोगों के खिलाफ फिलहाल सबूत नही है। 

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह), धारा 323 (किसी को चोट पहुचाना), धारा 465 (जालसाजी के लिए सजा), धारा 471(फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड को वास्तविक तौर पर इस्तेमाल करना), धारा 143 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र समूह का सदस्य होने के लिए सजा), धारा 149 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र सदस्य होना), धारा 147 (दंगा फैलाने के लिए सजा) और 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) के तहत आरोप लगाए गए है। 

पुलिस ने जेएनयू परिसर में नौ फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में दाखिल किया है। यह कार्यक्रम संसद हमला मामले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को फांसी की वर्षी पर आयोजित किया गया था। 

यह आरोपपत्र में सीसीटीवी के फुटेज, मोबाइल फोन के फुटेज और दस्तावेजी प्रमाण भी है। पुलिस का आरोप है कि कन्हैया कुमार ने भीड़ को भारत विरोधी नारे लगाने के लिए उकसाया था। भाजपा के सांसद महेश गिरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शिकायत पर वसंत कुंज पुलिस थाने में 11 फरवरी 2016 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए तथा 120बी के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। 

एबीवीपी ने कथित आयोजन को राष्ट्र विरोधी बताते हुए शिकायत की थी जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति रद्द कर दी थी। इसके बावजूद यह आयोजन हुआ था। गौरतलब है कि 9 फरवरी को जेएनयू कैम्पस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल ये तीनों जमानत पर है।
 

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