आखिर क्या है ये हिमालयन वियाग्रा, जिसके लिए चली गई 8 लोगों की जान

Published : Jun 07, 2019, 03:45 PM ISTUpdated : Jun 07, 2019, 03:47 PM IST
आखिर क्या है ये हिमालयन वियाग्रा, जिसके लिए चली गई 8 लोगों की जान

सार

यह जड़ी-बूटी पूरे एशिया और अमेरिका में 100 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 7,000 रुपये प्रति ग्राम से भी अधिक में बिकती है।

हिमालय में ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटी यार्सागुम्बा के लिए आठ लोगों ने अपनी जान गंवा दी। नेपाल के डोल्पा जिले में यह घटना हुई है। ये सभी लोग सेक्स पावर बढ़ाने वाली यार्सागुम्बा यानी हिमालयन वियाग्रा इकट्ठा करने के लिए निकले थे। यार्सागुम्बा 10,000 फुट से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में पाई जाती है। हर साल गर्मियों में हिमालय के आसपास रहने वाले लोग इस बेशकीमती जड़ी-बूटी की खोज में बहुत ऊंचाई तक जाते हैं। यह जड़ी-बूटी पूरे एशिया और अमेरिका में 100 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 7,000 रुपये प्रति ग्राम से भी अधिक में बिकती है।

नेपाल पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह इस दुर्लभ औषधि को इकट्ठा करने के लिए निकले 8 लोगों की मौत हो गई, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वह अपनी मां के साथ था और ऊंचाई पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को बर्दाश्त नहीं कर सका। 8 में से 5 लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई। वहीं 2 लोग इस बूटी को एक खड़ी चट्टान से इकट्ठा करते वक्त दुर्घटना के शिकार हो गए। 

यार्सागुम्बा के बारे में कहा जाता है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है जबकि वियाग्रा दिल के मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती है। इसके अलावा इसका उपयोग सांस और गुर्दे की बीमारी में भी होता है। कई लोग यह दावा करते हैं कि यह बुढ़ापे की रफ्तार भी कम कर देती है। साथ ही रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है।

'हिमालयन वियाग्रा' यानी 'यार्सागुम्बा'

यार्सागुम्बा को हिमालयन वियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में यार्सागुम्बा को जड़ी-बूटी की श्रेणी में रखा गया है, जो हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों जैसे नेपाल, भूटान, भारत और तिब्बत में मिलती है। दरअसल यह एक मृत कीड़ा है जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सेक्स क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है। इसलिए इसे हिमालयन वियाग्रा भी कहा जाता है। चीन में इसे हर्बल दवाओं के काम में लाया जाता है। यार्सागुम्बा एक कीड़ा है, जो समुद्र तल से 3800 मीटर ऊंचाई पर हिमालय की पहाड़ियों में पाया जाता है। वैसे तो यह कुछ मात्रा में भारत और तिब्बत में भी मिलता है पर मुख्य रूप से यह नेपाल में पाया जाता है। यह कीड़ा भूरे रंग का होता है जिसकी लंबाई लगभग 2 इंच होती है। यह कीड़ा यहां उगने वाले कुछ खास किस्म के पौधों पर ही पैदा होते हैं। (इनपुट एजेंसी से भी)
 

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