
अहमदाबाद। कोरोना संकट में खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए गुजरात सरकार ने एक पैनल का गठन किया है। यह पैनल गुजरात सरकार की राजकोषीय स्थिति और बजटीय स्थिति की भी समीक्षा करेगा। इसके साथ ही कोरोना संकट में राज्य को किस तरह उबरा जाए इसकी सलाह राज्य सरकार को देगा।
गुजरात सरकार ने पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अधिया के नेतृत्व में एक पैनल का गठन किया। जो मौजूदा आर्थिक संकट में अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करेगा। इस पैन में छह लोगों को शामिल किया गया है और ये एक एक महीने के भीतर अपनी व्यापक कार्य योजना (तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक) को तैयार करेगा। इसके साथ ही दो सप्ताह के भीतर एक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को देगा। महामारी में राज्य और इसकी अर्थव्यवस्था को काफी हद तक प्रभावित किया है।
राज्य ही नहीं देश में भी मांग और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं ये पैनल राज्य के बाहर प्रवासी श्रमिकों के पलायन से उत्पन्न होने वाली समस्या को लेकर भी सलाह देगा। फिलहाल राज्य सरकार प्रवासियों के पलायन को लेकर काफी चिंतित है। क्योंकि उद्योग का मानना है कि कोरोना संकट के बाद राज्य में श्रमिकों का संकट हो सकता है। पैनल प्रवासी श्रमिकों के बड़े पैमाने पर आंदोलन के मद्देनजर उनकी उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सिफारिशें भी देगा। यह पैनल विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए रणनीति भी तैयार करेगा।
इस पैनल में पूर्व आईआईएम-ए के प्रोफेसर रवींद्र ढोलकिया, वरिष्ठ कर सलाहकार मुकेश पटेल, वित्तीय विशेषज्ञ प्रदीप शाह, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी किरीट शेलत और गुजरात सरकार के एमडी और जीआईडीसी के एमडी एम. थेनारासन को शामिल किया गया है। असल में पिछले दिनों गुजरात के काफी संख्या में मजदूरों का पलायन हुआ है। जिसको लेकर राज्य सरकार चिंतित है। राज्य में ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिक हैं और पिछले दिनों ही राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से श्रमिकों को गुजरात में ही रहने की अपील के लिए कहा था।
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