
कांग्रेस महासचिव और गांधी परिवार में आज के दौर की ताकतवर हस्ती प्रियंका गांधी वाड्रा ने क्या अपनी दादी इंदिरा के सियासी दांव पेंच सीख लिए हैं। ये सवाल इसलिए भी है कि क्योंकि आपातकाल के बाद जिस तरह देश में कांग्रेस की स्थिति हो गयी थी तकरीबन मौजूदा दौर में वही स्थिति कांग्रेस की है।
पार्टी दो राहे पर खड़ी है और नेतृत्व भटका हुआ है। जिस तरह से प्रियंका यूपी के सोनभद्र में हुए सामूहिक नरसंहार को भुनाने की कोशिश में हैं। कभी इंदिरा गांधी ने भी बिहार के 'बेलछी नरसंहार' को अपनी सियासत की सीढ़ी बनाया था।
सोनभद्र में हुए सामूहिक नरसंहार में आठ लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि अभी कई लोग घायल हैं और उनका इलाज वाराणसी के ट्रामा सेंटर में चल रहा है। शुक्रवार को प्रियंका अपने लाव लश्कर के साथ सोनभद्र जाना चाहती थी। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के आदेश पर प्रियंका को मिर्जापुर में ही रोक लिया गया।
इसके बाद से ही प्रियंका वहां जाने की जिद कर रही हैं और जिला प्रशासन उन्हें वहां जाने नहीं दे रहा है। फिलहाल प्रियंका को मिर्जापुर के चुनार गेस्ट हाउस में रखा गया है। जहां कांग्रेस के नेताओं के जमावड़ा लगा हुआ है। लेकिन प्रियंका ने साफ कर दिया है कि वह सोनभद्र जाएंगी। भले ही उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
राजनीति के जानकारों को लगता है कि कांग्रेस आज के दौर में सबसे मुश्किल समय से गुजर रही है। पार्टी को संजीवनी चाहिए। लेकिन कैसे सबसे बड़ा सवाल ये ही है। राहुल गांधी इस्तीफा दे चुके हैं और ये भी कह चुके हैं कि गांधी परिवार का कोई भी सदस्य अध्यक्ष के पद पर काबिज नहीं होगा।
ऐसे में प्रियंका के पास एक मौका है जब वह इसके जरिए अपनी राजनीति को चमका सकती है। जानकारों का कहना है कि बिहार के बेलछी गांव में साल 1977 में हुए नरसंहार कांड के जरिए प्रियंका की दादी इंदिरा गांधी को भी बड़ा सियासी फायदा मिला था। लिहाजा सोनभद्र नरसंहार का राजनीति तौर फायदा लेने के लिए प्रियंका भी अपनी दादी के नक्शेकदम पर चल रही हैं।
जिस तरह की आज की स्थिति कांग्रेस की है। तकरीबन 1977 में भी कांग्रेस की स्थित ऐसी ही थी। इंदिरा गांधी की सरकार आपातकाल के बाद जनता का विश्वास खो चुकी थी और इंदिरा गांधी चुनाव भी हार गयी थी। लेकिन एक बेलछी नरसंहार के बाद कांग्रेस और इंदिरा का राजनीतिक पुनरुत्थान हुआ। जिसका लाभ कांग्रेस को कई सालों तक मिलता रहा।
जानें क्या है बेलछी कांड
बिहार के हरनौत विधानसभा के तहत आने वाले बेलछी गांव में 11 दलितों की हत्या कर दी गयी। ये बिहार का पहला जातीय नरसंहार था। ये घटना घटना 27 मई 1977 को हुई थी।
इंदिरा गांधी को मिली संजीवनी
असल में सत्ता खो चुकी इंदिरा गांधी जनता की नब्ज पकड़ने में माहिर थी। देश में मोराजी देसाई सरकार बने कुछ ही समय हुआ था और ये बेलछी सामूहिक नरसंहार हो गया। इंदिरा को इसके जरिए अपनी राजनीति को फिर से शिखर में पहुंचाने का मौका मिला। इंदिरा गांधी ने मौके की नजाकत को समझा और वह पटना पहुंची। वहां से कार बिहार शरीफ पहुंच गईं और फिर बेलछी जाने की तैयारी हुई।
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