
हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम बिल्डिंग का कमर्शियल इस्तेमाल नही कर रहे हैं। नेशनल हेराल्ड के जितने भी एडिटर इन चीफ रहे है वो गणमान्य व्यक्ति रहे है। बिल्डिंग की लीज एजेएल के नाम से है। बिल्डिंग खाली करने का आदेश देरी से दिया गया है जो तारीख दी गई है वह जांच के बाद दी गई है। कोर्ट 22 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा।
लेकिन सच यह है कि दिल्ली में आईटीओ स्थित हेराल्ड हाउस में पासपोर्ट कार्यालय सहित कई दफ्तर चल रहे हैं। पूरी बिल्डिंग का किराया लगभग 80 लाख रुपए आता है। शहरी विकास मंत्रालय की जांच में यह बात साबित हो गई है।
बता दें कि लीज खत्म करने संबंधी शहरी विकास मंत्रालय के 30 अक्टूबर के आदेश को एजेएल ने चुनौती दी गई है। केंद्र ने अपने आदेश में भवन की लीज खत्म करते हुए उसे 15 नवंबर तक खाली करने को कहा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि शहरी विकास मंत्रालय का आदेश 'गैरकानूनी, असंवैधानिक, मनमाना, बेईमानी भरा और बिना किसी अधिकार और अधिकार क्षेत्र के जारी किया गया था।' AJL, नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती है।
AJL का कहना है कि आदेश राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद विपक्षी पार्टियों की असंतोष की आवाज को दबाना व बर्बाद करना है।
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