IDT के फैशन डिजाइन छात्रों ने उत्तरायण से प्रेरित बच्चों के लिए पतंग-थीम डिज़ाइनर ड्रेस कलेक्शन तैयार किया। यह कलेक्शन परंपरा, आधुनिक डिज़ाइन, सुरक्षित फैब्रिक्स और बच्चों के कम्फर्ट का खूबसूरत संगम है।

सूरत (गुजरात)। उत्तरायण के रंग, उत्साह और पतंगों की उड़ान को फैशन की रचनात्मक अभिव्यक्ति में ढालते हुए Institute of Design & Technology (IDT) के फैशन डिजाइन छात्रों ने बच्चों के लिए एक विशेष पतंग-थीम आधारित डिज़ाइनर ड्रेस कलेक्शन तैयार किया। यह कलेक्शन उत्तरायण की पारंपरिक भावना के साथ आधुनिक सोच और बच्चों के आराम का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है।

बच्चों के लिए सुरक्षित, आरामदायक और रंगीन डिज़ाइन

इस कलेक्शन को खासतौर पर बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। ड्रेस में किड्स-सेफ फैब्रिक्स, हल्के व चटख रंग, आरामदायक फिट्स और फेस्टिव प्रिंट्स का इस्तेमाल किया गया है, ताकि बच्चे पूरे दिन बिना किसी परेशानी के उत्तरायण के उत्सव का आनंद ले सकें।

निता मैम के मार्गदर्शन में छात्रों की रचनात्मक उड़ान

इस अनोखे प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन निता मैम ने किया। उनके अनुभव और प्रेरणा से छात्रों ने उत्तरायण की खुशी, बच्चों की मासूमियत और डिज़ाइन की बारीकियों को एक साथ जोड़ा। छात्रों ने हर डिज़ाइन में त्योहार की ऊर्जा और बच्चों की आज़ादी को दर्शाने का प्रयास किया।

छात्रों की सोच: फैशन से आगे एक एहसास

छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा-

हम चाहते थे कि बच्चे जब ये ड्रेस पहनें, तो उन्हें सिर्फ फैशन नहीं बल्कि उत्तरायण की खुशी, आज़ादी और रंगों की ऊर्जा महसूस हो। पतंगों के रंग हमारी डिज़ाइनों की आत्मा हैं।

IDT Director Ankita Goyal का विज़न

IDT की Director, Ankita Goyal ने इस पहल पर कहा-

IDT में हमारा फोकस केवल क्लासरूम लर्निंग तक सीमित नहीं है। उत्तरायण जैसे भारतीय त्योहारों को लाइव डिज़ाइन प्रोजेक्ट में बदलना छात्रों को वास्तविक इंडस्ट्री एक्सपीरियंस और सांस्कृतिक समझ दोनों देता है। इस कलेक्शन में छात्रों ने यह साबित किया है कि वे संस्कृति, कम्फर्ट और क्रिएटिविटी—तीनों के बीच बेहतरीन संतुलन बना सकते हैं। यही सोच उन्हें भविष्य का एक सफल और जिम्मेदार फैशन डिज़ाइनर बनाती है।

शिक्षा और संस्कृति का प्रेरणादायक संगम

IDT की यह पहल शिक्षा, संस्कृति और रचनात्मकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है, जहाँ उत्तरायण का उत्सव फैशन के माध्यम से बच्चों की मुस्कान और रंगीन सपनों में बदलता हुआ नज़र आया।