
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने राफेल सौदे पर दावे ऐसे समय किए हैं जब वह स्वयं इन आरोपों का सामना कर रहे हैं कि उनके सहयोगी को कुछ खास उद्देश्य से कुछ धन प्राप्त हुआ। ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में उन्होंने कहा, ‘...फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति (ओलांद) को देखिए, खुद उन पर आरोप है कि उनके सहयोगी ने खास उद्देश्य से कुछ धन प्राप्त किया।’
सीतारमण ने कहा, ‘‘यह (आरोप) सच भी हो सकता है या सच नहीं भी हो सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में, पूर्व राष्ट्रपति यह सब कह रहे हैं...।’ फ्रांस की मीडिया में 21 सितंबर को आई एक खबर में कथित रूप से ओलांद के हवाले से कहा गया था कि भारत सरकार ने 58 हजार करोड़ रुपये के राफेल लड़ाकू विमान सौदे में दसॉल्ट एविऐशन के भागीदार के लिए रिलायंस डिफेंस कंपनी का नाम सुझाया था और फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था।
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 30 अगस्त के ट्वीट पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उन्हें पहले से ओलांद के कदम का अंदाजा था। उन्होंने कहा, ‘...यह पहले से ही कर दिया गया। यह बहुत दिलचस्प है।’ गांधी ने 30 अगस्त को ट्वीट किया था, ‘वैश्विक भ्रष्टाचार। यह राफेल विमान बहुत दूर और तेज उड़ता है। यह अगले कुछ सप्ताह में कुछ बड़े शक्तिशाली बम गिराने वाला है। मोदी जी कृपया अनिल से कहिए कि फ्रांस में यह बड़ी समस्या है।’
रूस के साथ एस-400 सौदे में देरी से जुड़े सवाल पर सीतारमण ने कहा कि सौदा लगभग ऐसे चरण में है जहां इसे अंतिम रूप दिया जा सके। यह पूछे जाने पर कि क्या सीमा पार ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का घुसपैठ पर निवारक के रूप में असर हुआ है, उन्होंने कहा कि उनमें से कई (घुसपैठिये) को सीमा पर ही मार गिराया जा रहा है और उन्हें अंदर नहीं आने दिया जा रहा।
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस तरह की कार्रवाई पाकिस्तान को आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें यहां भेजने से रोकेगी।’ (इनपुट भाषा से भी)
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