
नई दिल्ली। पाकिस्तान की विश्व स्तर पर बेइज्जती हो चुकी है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को उनके नाम के साथ ही बेइज्जत कर दिया। जब भारत ने इमरान खान का पूरा नाम इमरान खान नियाजी लिया तो उन्हें काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। जिसके बाद इमरान खान काफी बौखला गए। असल में पाकिस्तान में नियाजी को हार का प्रतीक माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की तरह से प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में घेरा। जिसको लेकर पाकिस्तान खुद को बचाने की कोशिश करता रहा। मैत्रा ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए बलूचिस्तान, सिंध समेत कई हिस्सों में पाकिस्तान सेना को संयुक्त राष्ट्र संघ में दुनिया के सामने बेनकाब किया। लेकिन इसी दौरान मैत्रा ने पाक पीएम इमरान खान का पूरा नाम इमरान खान नियाजी कहा तो पाकिस्तान का सिर शर्म से झुक गया।
दरअसल नियाजी को इमरान खान अपने नाम के पीछे नहीं लगाते हैं। वो इन जाति को लगाने में शर्म महसूस करते हैं। असल में इसकी वजह 1971 की लड़ाई है। जिसमें पाकिस्तानी सेना के जनरल एएके नियाजी ने अपनी फौज के साथ भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर सिर झुका लिया था और जान की भीख मांगी थी। लिहाजा अब पाकिस्तान में ज्यादातर लोग नियाजी सरनेम का इस्तेमाल नहीं करते हैं। पाकिस्तान में नियाजी एक पख्तून आदिवासी जाति मानी जाती है। इन्हें पूर्वी अफगानिस्तान का माना जाता है जो अब उत्तरी-पश्चिमी पंजाब के मियांवाली में आकर बस गई हैं।
भारत ने इमरान खान का भाषण नफरत से भरा हुआ था और उन्होंने यूएन के मंच से भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी। इमरान खान का ये बयान काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित 130 आतंकी पाकिस्तान में रहते हैं और दुनिया का अकेला मुल्क है जहां आतंकियों को पेंशन दी जाती। पाकिस्तानी की सरपरस्ती में दुनिया का सबसे मोस्ट वांटेड आतंकी रहता है। जो पाकिस्तान कश्मीर की बात कर रहा। उसके वहां पर अल्पसंख्यक 23 फीसदी से एक फीसदी रह गए हैं।
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