बच्ची के इलाज के लिए भारत ने दिखाई दरियादिली, लेकिन आतंकी पाकिस्तान कहां समझे इंसानियत

Published : Oct 20, 2019, 08:47 AM IST
बच्ची के इलाज के लिए भारत ने दिखाई दरियादिली, लेकिन आतंकी पाकिस्तान कहां समझे इंसानियत

सार

 इमरान खान सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तान में दवाओं का अकाल पड़ गया है और इलाज के लिए पाकिस्तानियों को अन्य देशों की तरफ रूख करना पड़ रहा है। जहां पर इलाज काफी महंगा है। पाकिस्तान में अभी भी रेबिन की वैक्सीन मौजूद नहीं है और भारत ये वैक्सीन एक हजार में मिल जाती थी वहीं अब इसे यूरोप से मंगाने में 70 हजार रुपये का खर्च आ रहा है।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते खत्म हो गए हैं। हालांकि भारत पर इसका ज्यादा असर नहीं हुआ है। लेकिन पाकिस्तान को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पाकिस्तानी अगस्त से पहले सस्ते इलाज के लिए भारत आते थे। लेकिन पाकिस्तान द्वारा व्यापारिक रिश्तों को खत्म करने के बाद पाकिस्तान मरीजों को इलाज कराना काफी महंगा पड़ रहा है। अभी पाकिस्तान में दवाओं की कमी चल रही है और इमरान खान सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह यूरोप से महंगे दाम में दवा मंगा सके।

असल में एक सात साल की पाकिस्तानी बच्ची को भारत में इलाज के लिए आना था। लेकिन पाकिस्तान की सरकार द्वारा रिश्ते तोड़े जाने के कारण उसे वीजा मिलने में दिक्कत हो रही थी। लिहाजा अब भारत सरकार ने इस बच्ची के इलाज के  लिए वीजा दे दिया है। क्योंकि भारत सरकार ने इंसानियत दिखाते हुए पहले बच्ची का इलाज कराना जरूरी समझा है। अब इस बच्ची का इलाज भारत में हो सकेगा। इस बच्ची की मदद की दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने।

गंभीर के पास पाकिस्तान से उनके क्रिकेटर मित्र ने फोन कर इस बच्ची के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्ची को वीजा नहीं मिल रहा है। जबकि वह गंभीर बीमारी से जूझ रही है। जिसके बाद गौतम गंभीर ने विदेश मंत्रालय से बात की। जिसके बाद विदेश मंत्री ने बताया कि इसके लिए भारतीय दूतावास को समूचित कार्यवाही करने का आदेश दिया गया है। इस मामले में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग को उमैयमा अली एवं उसके अभिभावकों को जरूरी वीजा देने का निर्देश दिया है।

गंभीर ने बताया कि पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ी मोहम्मद यूसुफ ने फोन पर इस बच्ची के बारे में जानकारी दी और उनसे मदद करने की गुहार लगाई। इसके बाद उन्होंने एक अक्टूबर को बच्ची की मदद के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा। गौरतलब है कि इमरान खान सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तान में दवाओं का अकाल पड़ गया है और इलाज के लिए पाकिस्तानियों को अन्य देशों की तरफ रूख करना पड़ रहा है। जहां पर इलाज काफी महंगा है।

पाकिस्तान में अभी भी रेबिन की वैक्सीन मौजूद नहीं है और भारत ये वैक्सीन एक हजार में मिल जाती थी वहीं अब इसे यूरोप से मंगाने में 70 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। जिसको लेकर पाकिस्तान की आवाम इमरान सरकार ने नाराज है। पहले पाकिस्तान से लोग सस्ते इलाज के लिए भारत आते थे। लेकिन अब इनका आना बंद हो गया है।

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