यूरोपीय संसद में भारत को मिली जीत, सीएए पर बहस का प्रस्ताव मार्च तक टला

Published : Jan 30, 2020, 10:31 AM ISTUpdated : Jan 30, 2020, 10:58 AM IST
यूरोपीय संसद में भारत को मिली जीत, सीएए पर बहस का प्रस्ताव मार्च तक टला

सार

यूरोपीय संसद की तरफ से आए बयान के मुताबिक "भारत के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के प्रस्ताव पर मतदान स्थगित कर दिया गया है"। अब इसे  मार्च तक टाल दिया गया है। वहीं इसके लिए होने वाले मतदान के स्थगित होने के पीछे के कारणों का उल्लेख यूरोपीय संसद ने नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि भारत सरकार के दबाव के कारण संसद ने इस प्रस्ताव को मार्च तक के लिए टाल दिया है।

नई दिल्ली। भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकरयूरोपीय संसद में होने वाली बहस को अब मार्च  तक के लिए टाल दिया गया है। इसे भारत की बड़ी और पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यूरोपीय संसद के सदस्यों द्वारा पेश किए गए पांच प्रस्तावों पर बहस होनी थी और इन्हें अंतिम एजेंडे में रखा गया था। लेकिन बाद में इस मार्च के लिए टाल दिया गया है। ये फैसला भारत की तरफ से कड़ी आपत्ति के बाद लिया गया है। माना जा रहा है कि एक तरह से ये ठंडे बस्ते में चला गया है। इस प्रस्ताव को लाने में पाकिस्तान में पैदा हुए यूरोपियन संसद के सदस्य शफाक मोहम्मद की अहम भूमिका है। 

यूरोपीय संसद की तरफ से आए बयान के मुताबिक "भारत के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के प्रस्ताव पर मतदान स्थगित कर दिया गया है"। अब इसे  मार्च तक टाल दिया गया है। वहीं इसके लिए होने वाले मतदान के स्थगित होने के पीछे के कारणों का उल्लेख यूरोपीय संसद ने नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि भारत सरकार के दबाव के कारण संसद ने इस प्रस्ताव को मार्च तक के लिए टाल दिया है। हालांकि फ्रांस पहले ही कह चुका है कि नागरिकता संसोधन कानून भारत का आंतरिक मामला है।

लेकिन उसके बावजूद यूरोपीय संसद ने इस पर बहस कराने के लिए प्रस्ताव लेकर आई है। भारत सरकार ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला जताते हुए यूरोपीय संसद से नाराजगी जताई थी। भारत ने साफ कर दिया था कि आंतरिक मुद्दा होने के नाते किसी दूसरे पक्ष को इसमें बोलने का अधिकार नहीं है। सरकार ने साफ किया था कि इस कानून के तहत पड़ोसी देशों में गैर धर्मों के लोगों खासतौर से हिंदूओं पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए उन्हें नागरिकता देना है।

बल्कि किसी नागरिकता छिनना नहीं है। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी यूरोपीय संसद के अध्यक्ष डेविड मारिया सासोली को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जता दी थी। बिडला ने लिखा था कि एक  विधायिका के फैसले पर किसी भी तरह का प्रस्वाव लाना अनुचित है।
 

PREV

MyNation Hindi पर पाएं आज की ताजा खबरें (Aaj Ki Taza Khabar)। यहां आपको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ब्रेकिंग न्यूज़ और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं की तुरंत और भरोसेमंद जानकारी मिलती है। राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन और टेक सहित हर बड़ी खबर पर रहें अपडेट—तेज, सटीक और आसान भाषा में।

Recommended Stories

21BY72 Season 5: सूरत बना स्टार्टअप हब, निवेशकों और युवाओं का महाकुंभ
World Motorcycle Day: Ajay's Cafe और GMRA की अनोखी पहल, सुरक्षित राइडिंग का बड़ा संदेश