
भारत-म्यांमार सीमा आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। भारत और म्यांमार एक-दूसरे से 1600 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। म्यांमार पूर्वोत्तर के चार राज्यों से जुड़ा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित रोहिंग्या आतंकियों समेत कई स्थानीय आतंकी संगठन इस सीमा को भारत में घुसने के लिए ट्रांजिट प्वाइंट बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय गृहमंत्रालय के अनुसार, दो साल में भारत-म्यांमार सीमा से सबसे ज्यादा घुसपैठ के मामले सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर अन्य सीमाओं की तुलना में यहां सबसे ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। गृहमंत्रालय के डाटा के अनुसार, भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों ने औसत हर तीन दिन में एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। इस सीमा पर घुसपैठ के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। दोनों देशों के बीच 16 किलोमीटर लंबा फ्री जोन है। इस पर कहीं भी बाड़ नहीं लगी है। इस साल भी जुलाई तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सुरक्षा बलों ने 66 आतंकियों को पकड़ा और तीन को घुसपैठ की कोशिश करते मार गिराया।
इस साल जुलाई में रोहिंग्या आतंकियों ने सीमा पर असम राइफल्स के जवानों पर गोलीबारी की थी। अराकन रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी (एआरएसए) ने असम राइफल्स के गश्ती दल पर हमला किया था। भारत में आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने के लिए एआरएसए को आईएसआई से समर्थन मिल रहा है। इसी तरह वर्ष 2017 में भारत-म्यांमार सीमा पर घुसपैठ की कुल 99 वारदात हुई हैं। इनमें नौ आतंकी मारे गए जबकि 130 को जिंदा पकड़ा गया है। भारत-म्यांमार सीमा को छोड़ दिया जाए तो किसी और सीमा (जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को छोड़कर) इतने बड़े पैमाने पर घुसपैठ नहीं हुई।
हाल ही में भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक सीमा पार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अब, दोनों देशों की सरकारें वहां चेक पोस्ट खोलेंगे, जहां इमिग्रेशन अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। ताकि अवैध घुसपैठ को रोका जा सके। मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की सीमा म्यांमार से सटी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, 'सरकार 1600 किलोमीटर से लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर असम राइफल्स को बीएसएफ से बदलने की योजना बना रही है। असम राइफल्स वहां वर्षों से तैनात है लेकिन उग्रवाद को नियंत्रित करने में वह अच्छे नतीजे नहीं दे सकी है। लेकिन अब भी सेना असम राइफल्स को ही भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात रखना चाहती है।'
पिछले दो साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2017 में जम्मू-कश्मीर को छोड़कर अन्य राज्यों से सटी भारत-पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ की 10 घटनाएं हुईं। इनमें दो आतंकी मारे गए। वहीं 2018 में 26 जुलाई तक के आंकड़ों में 4 घटनाएं सामने आई हैं। वहीं भारत-म्यांमार सीमा पर 2017 में घुसपैठ की 99 घटनाएं हुईं। इनमें 9 आतंकी मारे गए जबकि 130 आतंकी/घुसपैठियों को जीवित पकड़ा गया। वर्ष 2018 में भी जुलाई तक 64 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें 3 आतंकी मारे गए जबकि 66 आतंकी/घुसपैठियों को पकड़ा गया। वहीं भारत-बांग्लादेश और भारत-चीन सीमा पर दोनों वर्षों में एक भी मामला सामने नहीं आया। भारत-भूटान सीमा पर भी यही स्थिति रही। वहीं भारत-नेपाल सीमा पर 2017 में एक आतंकी को जीवित पकड़ा गया।
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