जेटली का कांग्रेस पर हमला, ‘डूबते राजवंश’को बचाने के लिए राफेल पर लगातार बोला जा रहा झूठ

Published : Feb 12, 2019, 07:28 PM IST
जेटली का कांग्रेस पर हमला, ‘डूबते राजवंश’को बचाने के लिए राफेल पर लगातार बोला जा रहा झूठ

सार

‘डूबते राजवंश’ को बचाने के लिए और कितने झूठ बोले जाएंगे’ शीर्षक से लिखी गई है फेसबुक पोस्ट। जेटली ने लिखा, कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का असर अब ‘महाझूठबंधन’ के उसके दूसरे साथियों पर भी दिखने लगा है। 

कांग्रेस के खिलाफ इन दिन ब्लॉग वार छेड़े हुए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस एक ‘डूबते राजवंश’ को बचाने के लिए झूठ पर झूठ फैलाने में लगी है। यह पोस्ट ‘डूबते राजवंश’ को बचाने के लिए और कितने झूठ बोले जाएंगे’ शीर्षक से लिखी गई है।

जेटली ने फेसबुक ब्लॉग में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) राजीव महर्षि पर राफेल मामले के ऑडिट में हितों के टकराव के आरापों को भी खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय में 2014- 15 के अपने कार्यकाल के दौरान महर्षि ने लड़ाकू विमान सौदे से जुड़ी कोई भी फाइल अथवा दस्तावेज को नहीं देखा।

 सबुक पोस्ट में जेटली ने कहा कि ‘डूबते राजनीतिक परिवार को बचाने के लिए और कितने झूठ बोलने की जरूरत पड़ेगी? निश्चित रूप से भारत इससे बेहतर चीज का हकदार है।’ उन्होंने कहा कि इस झूठ छुआ-छूत का प्रभाव काफी बढ़ गया। कांग्रेस द्वारा फैलाये जा रहे झूठ का असर अब ‘महाझूठबंधन’ के उसके दूसरे साथियों पर भी दिखने लगा है। 

जेटली ने कहा, ‘राफेल सौदे में जहां हजारों करोड़ों रुपये के सरकारी धन की बचत की गई है, उसको लेकर रोजाना एक नया झूठ खड़ा किया जा रहा है। इस मामले में ताजा झूठ मौजूदा कैग और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को लेकर गढ़ा गया है।’ 

मौजूदा कैग राजीव महर्षि 2014- 15 में आर्थिक मामलों के सचिव के तौर पर वित्त मंत्रालय में कार्यरत थे। मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने की वजह से उन्हें वित्त सचिव के तौर पर नामित किया गया। 

जेटली ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘मैं गलत साबित होने के डर के बिना यह कह सकता हूं कि राफेल विमान सौदे से जुड़ी कोई भी फाइल अथवा दस्तावेज कभी भी उनके (महर्षि) के पास नहीं गई और न ही रक्षा खरीद के इस सौदे से वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़े थे। सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा किये जाने वाले खर्च पर सचिव (व्यय) की मंजूरी लेनी होती है।’ 

जेटली ने कहा कि यह समझ से परे है कि कैग के खिलाफ इस तरह का हितों के टकराव का झूठ क्यों उठाया जा रहा है जो कि कभी था ही नहीं। जेटली ने कहा कि ‘यह राजनीतिक परिवार जानता है कि 500 करोड़ बनाम 1,600 करोड़ रुपये की उसकी बच्चों की कहानी कपोल कल्पित कहानी है। इस कहानी पर कोई विश्वास नहीं करता है। तथ्य इसका साथ नहीं देते । इसीलिए कैग रिपोर्ट के निष्कर्ष प्रकाशित होने से पहले ही कैग जैसी संस्था के खिलाफ पेशबंदी कर हमला शुरू कर दिया गया।’ 

केन्द्रीय मंत्री ने राहुल गांधी का नाम लिये बिना ही कहा कि इस ‘राजवंश के लाडले’ और उनके मित्रों ने इससे पहले राफेल को लेकर दायर रिट याचिका को खारिज किये जाने पर सुप्रीम कोर्ट को भी कटघरे में खड़ा किया था। 

जेटली ने कहा कि राफेल कीमत को लेकर कांग्रेस के पूरे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और इससे संबंध में जो प्रक्रियागत मुद्दे जो उठा रहे हैं कि कोई रक्षा खरीद परिषद नहीं थी, कोई सीसीएस नहीं थी, कोई अनुबंध बातचीत समिति नहीं थी, सरासर झूठ है। 

उन्होंने कहा, ‘एक निजी कंपनी को जिस 30,000 करोड़ रुपये देने की बात की जा रही है वह कहीं है नहीं। एक समाचार पत्र द्वारा दस्तावेज के एक हिस्से का इस्तेमाल करना अपने आप में अप्रत्याशित है। अधूरे दस्तावेज का इस्तेमाल करना निश्चित तौर पर बोलने की आजादी की भावना के अनुरूप नहीं हो सकता।’ 

जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसी शर्त के न होने का तर्क इस तथ्य की अनदेखी करता है कि रूस और अमेरिका के साथ पहले हुए अंतर-सरकारी सौदों में भी इस तरह के अनुबंध नहीं थे। अब अंश मात्र सच्चाई के बिना भी कैग के खिलाफ हितों के टकराव का आरोप गढ़ा जा रहा है।

जेटली ने कहा कि सत्य बेशकीमती और पवित्र होता है। परिपक्व लोकतंत्र में जो लोग जानबूझ कर झूठ का सहारा लेते हैं वे सार्वजनिक जीवन से लुप्त हो जाते हैं। आज की दुनिया में राजवंशों की अपनी अंतर्निहित सीमाएं होती है। प्रगति की अभिलाषा रखने वाला समाज राजतंत्र को पसंद नहीं करता। ऐसे समाज के लोग जवाबदेही और काम देखना पसंद करते हैं। लेकिन भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी एक राजवंश की कैदी हो चुकी है। 

इसके तमाम वरिष्ठ नेताओं में साहस और नैतिक अधिकार नहीं है कि वह इस परिवार के लोगों को रास्ता बदलने की सलाह दे सकें। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं में यह प्रवृत्ति 70 के दशक में शुरू हुई। आपातकाल के समय यह पराकाष्ठा पर थी और उसके बाद भी यह बनी हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ‘गुलाम’ की सोच के कारण उन्हें ‘राजवंश’ की स्तुतिगान करना ही अच्छा लगता है। इसके विरुद्ध कोई बात करने से उनका राजनीतिक जीवन खत्म हो सकता है। इसी लिए जब ‘राजपरिवार का यह व्यक्ति’ बोलता है तो वे भी स्वर में स्वर मिलाने लगते हैं। 
 

PREV

MyNation Hindi पर पाएं आज की ताजा खबरें (Aaj Ki Taza Khabar)। यहां आपको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ब्रेकिंग न्यूज़ और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं की तुरंत और भरोसेमंद जानकारी मिलती है। राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन और टेक सहित हर बड़ी खबर पर रहें अपडेट—तेज, सटीक और आसान भाषा में।

Recommended Stories

Surat News: Skyera Airhostess Training Institute के छात्रों को मिला Hospitality Industry का प्रैक्टिकल अनुभव
CBSE 12th Board Result 2026: सूरत के GD Goenka International School के छात्रों का शानदार प्रदर्शन, 13वीं बार 100% रिजल्ट