करगिल विजय दिवस: पांच वीर सपूतों ने कर दिया था पाक सेना को घुटने को मजबूर, दुश्मनों ने दिया था शेरशाह नाम

Published : Jul 26, 2020, 01:06 PM ISTUpdated : Jul 26, 2020, 01:11 PM IST
करगिल विजय दिवस: पांच वीर सपूतों ने कर दिया था पाक सेना को घुटने को मजबूर, दुश्मनों ने दिया था शेरशाह नाम

सार

 आज पूरा देश भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1999 के कारगिल युद्ध की 21 वीं सालगिरह मना रहा है। असल में 3 मई 1999 से लेकर 26 जुलाई तक भारत और पाकिस्तान के बीच करगिल में युद्ध चला था। जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों और रेंजर्स को ढेर कर दिया। 

नई दिल्ली। आज पूरा देश करगिल विजय दिवस की 21 सालगिरह मना रहा है। आज ही के दिन भारतीय की वीर सेना ने पाकिस्तान सेना को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था और भारत ने करगिर चोटियों पर तिरंगा फहराया था। आज पूरा देश भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1999 के कारगिल युद्ध की 21 वीं सालगिरह मना रहा है। असल में 3 मई 1999 से लेकर 26 जुलाई तक भारत और पाकिस्तान के बीच करगिल में युद्ध चला था। जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों और रेंजर्स को ढेर कर दिया। इस युद्ध में भारत के 500 से ज्यादा बहादुर वीर सैनिक शहीद हुए हैं उन्ही का याद में देश में आज विजय दिवस मनाया जाता है।

भारतीय सेना के चर्चे दनियाभर में होते हैं। क्योंकि जिस विषम परिस्थितियों में भारत के वीर जवानों ने करगिल पर फिर से कब्जा कर देश का तिरंगा फहराया। उससे दुश्मन पाकिस्तान भी कायल हो गया। क्योंकि सीधे 90 डिग्री पर बैठ दुश्मनों को ढेर कर भारतीय सेना ने अपनी चौकियों पर कब्जा किया था। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना भी भारत के वीर जवानों की बहादुरी को देखते हुए तरह तरह के नाम दिए। पाकिस्तानी सेना ने कैप्टन विक्रम बत्रा को शेरशाह का नाम दिया। 

कैप्टन विक्रम बत्रा-हिमाचल प्रदेश निवासी कैप्टन बत्रा ने पहले मर्चेंट नेवी में शामिल होने का फैसला किया। लेकिन बाद वह सेना में भर्ती हो गए। उनकी बहादुरी को देखते हुए पाकिस्तानी सेना उन्हें 'शेरशाह' नाम से बुलाती थी। कैप्टन बत्रा ने करगिल के द्रास सेक्टर में स्थित पीक 5140 पर पाकिस्तानी सेना को ढेर कर कब्जा किया था। 

संजय कुमार- देश के बहादुर राइफलमैन संजय कुमार ने पाकिस्तानी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे और वह अपनी पोस्ट को छोड़कर भागने को मजबूर हो गए थे। इसके लिए संजय कुमार को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। संजय कुमार ने पाकिस्तानी सैनिकों के साथ 4 जुलाई 1999 को हाथ से हाथ की लड़ाई में परास्त कर दिया था। जबकि वह गंभीर चोटों का सामना कर रहे थे। घायल होने के बावजूद उन्होंने तीन दुश्मन पाक सैनिकों को मार डाला।

योगेंद्र सिंह यादव- योगेन्द्र सिंह यादव की पलटन को टाइगर हिल पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था और उन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान कई पाक सैनिकों को मार गिराया था। इस दौरान उन्होंने चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था और चौकियों पर कब्जा किया था।

लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे- गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे करगिल के इस ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपनी टीम के साथ खलुबर टॉप पर कब्जा कर पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उन्होंने लड़ते हुए पाकिस्तान के चार सैनिकों को मार गिराया था। उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें सेना का सर्वोच्च पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया था।

कैप्टन अनुज नैय्यर- कैप्टन अनुज नैय्यार ने प्वाइंट 4875 पर कब्जा कर पाकिस्तान के सैनिकों को मार गिराया था। उनकी इस वीरता के लिए मरणोपरांत उनकी वीरता के लिए दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार महा वीर चक्र से सम्मानित किया गया। कैप्टन नैय्यर ने नौ पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था और कई बंकरों नष्ट कर दिया।
 

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