टीपू सुल्तान को लेकर कर्नाटक सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Published : Jan 21, 2020, 05:05 PM IST
टीपू सुल्तान को लेकर कर्नाटक सरकार ने लिया बड़ा फैसला

सार

फिलहाल राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की नेतृत्व में एक बैठक में ये लिया गया है। हालांकि राज्य के कई विधायक टीपू सुल्तान के अध्याय को हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं।  भाजपा का मानना है कि कि  टीपू एक अत्याचारी और हिंदू विरोधी शासक था। लिहाजा अब राज्य में सरकार बनने के बाद टीपू जयंती के आयोजनों पर रोक लगा दी गई।  

बंगलुरू। कर्नाटक की भाजपा सरकार ने टीपू सुल्तान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य की येदियुरप्पा सरकार ने फैसला किया है कि वह   राज्य के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम से टीपू सुल्तान का अध्याय नहीं हटाएगी बल्कि इसमें कुछ अन्य तथ्यों को भी जोड़ा जाएगा। सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में टीपू सुल्तान की नकारात्मक छवि को भी पेश करेगी।

फिलहाल राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की नेतृत्व में एक बैठक में ये लिया गया है। हालांकि राज्य के कई विधायक टीपू सुल्तान के अध्याय को हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन राज्य सरकार ने अब कर्नाटक में मैसूर के विवादित शासक रहे टीपू सुल्तान को सरकारी पाठ्यक्रमों से न हटाने का फैसला किया है। राज्य सरकार किसी वर्ग विशेष को नाराज नहीं करना चाहती है। हालांकि कांग्रेस इसे पहले ही बड़ा मुद्दा बना चुकी है।

लिहाजा कांग्रेस को पटखनी देते हुए राज्य सरकार ने टीपू सुल्तान की नकारात्मक छवि को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। फिलहाल राज्य सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में सियासत गरम हो सकती है। हालांकि कर्नाटक सरकार ने टीपू सुल्तान के जन्म दिन पर किसी भी तरह के सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन न करने का फैसला किया है। हालांकि पहले की कांग्रेस सरकार के  दौरान टीपू  सुल्तान पुण्यतिथि पर सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था।  राज्य सरकार ने साफ कहा कि अगले शैक्षिक वर्ष 2020-21 के पाठ्यक्रम में  कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

फिलहाल राज्य सरकार ने फैसला किया है कि राज्य सरकार पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए एक नई कमेटी का गठन करेगी। क्योंकि अगले शैक्षिक सत्र के लिए स्कूलों को किताबें और यूनीफार्म दिया जा चुका है। असल में राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार ने टीपू सुल्तान जयंती को मनाना शुरू किया था, जिसका राज्य के कई संगठनों और भाजपा ने विरोध किया था। क्योंकि भाजपा का मानना है कि कि  टीपू एक अत्याचारी और हिंदू विरोधी शासक था। लिहाजा अब राज्य में सरकार बनने के बाद टीपू जयंती के आयोजनों पर रोक लगा दी गई।
 

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