
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश में जल्द ही तीन राजधानियां हो सकती हैं। जो तीन अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। राज्य के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने बताया कि राज्य के उत्तरी तटीय आंध्र, मध्य आंध्र और रायलसीमा के लिए अलग-अलग राजधानी हो सकती है। हालांकि अभी राज्य की राजधानी अमरावती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राज्य का विकास तेजी होगा और लोगों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने विधान सभा में कहा कि उनकी सरकार की तीन राजधानियों को विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर विकसित करने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है तो आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य होगा जहां एक प्रदेश की तीन राजधानी होंगी। इसके तहत एक विधायी राजधानी, एक कार्यकारी राजधानी और एक न्यायिक राजधानी होगी। लेकिन राज्य की मौजूदा राजधानी अमरावती इनका केन्द्र होगा।
उन्होंने कहा कि अमरावती को विधायी राजधानी बनाया जा सकता है और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने की योजना है। हालांकि राज्य सरकार की इस योजना का विपक्षी पार्टी टीडीपी ने कड़ा विरोध किया है। टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू ने कहा कि राज्य सरकार की ये योजना किसी भी तरह व्यवहारिक नहीं है। लिहाजा इस मुद्दे पर टीपीडी ने विधानसभा से बहिष्कार किया। फिलहाल राज्य सरकार ने इसके लिए एक समिति का गठन किया है।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीएन राव की अध्यक्षता में बनाई गई विशेषज्ञ समिति अगले दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज् सरकार को देगी। राज्य सरकार ने तीन राजधानी बनाने के लिए तर्क दिए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में भी तीन राजधानियां है। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की राजधानी ब्लोमफ़ोन्टिन, प्रिटोरिया और केपटाउन हैं और राज्य इसी अवधारणा पर विचार कर रहा है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में वाईआरएस कांग्रेस टीडीपी को हरा कर सत्ता में आई है और राज्य के सीएम जगन मोहन रेड्ड़ी अपने फैसलों को लेकर चर्चा में हैं।
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