मालेगांव धमाकाः सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय

Published : Oct 30, 2018, 03:29 PM IST
मालेगांव धमाकाः सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय

सार

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकल पर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट होने से 6 व्यक्तियों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे।

एनआईए की विशेष अदालत ने वर्ष 2008 के मालेगांव धमाका मामले में सात आरोपियों पर आतंकी साजिश रचने के आरोप तय कर दिए हैं। कर्नल श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी आरोपियों पर हत्या और अन्य अपराध का भी आरोप है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। 

आरोप तय किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा, पहले एनआईए ने मुझे क्लीनचिट दे दी थी। अब मेरे खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। यह कांग्रेस की साजिश थी, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मैं निर्दोष साबित होऊंगी क्योंकि सच्चाई की हमेशा जीत होती है। 

उत्तर महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकल पर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट होने से 6 व्यक्तियों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे।

इससे पहले, सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एएस गडकरी की एकल पीठ हालांकि पुरोहित की उस याचिका पर अगले महीने सुनवाई के लिए सहमत हो गई जिसमें उन्होंने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत अपने अभियोजन को चुनौती दी है। पुरोहित इस मामले के 7 आरोपियों में से एक है।

पीठ ने एनआई के वकील संदेश पाटिल को मामले की अगली सुनवाई की तिथि 21 नवंबर तक पुरोहित की अर्जी का एक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने निचली अदालत में सुनवाई पर रोक लगाने का पुरोहित का अनुरोध अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट और बंबई  हाईकोर्ट दोनों ने ही इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया था।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 31 मई 2016 को मामले में नई चार्जशीट फाइल की थी। इसमें रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया गया। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा, धानसिंह चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पुख्ता सबूत नहीं होने की बात कही थी। 

अपनी चार्जशीट में एनआईए ने कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को धमाकों की साजिश के प्रमुख आरोपियों में से एक बताया था। हालांकि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे कई आरोपियों ने खुद को बरी करने की याचिका दायर की। 25 अप्रैल 2017 को बांबे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी, लेकिन कोर्ट ने श्रीकांत पुरोहित को जमानत नहीं दी। 23 अगस्त 2017 को कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली और वे 9 साल बाद जेल से बाहर आए। 27 दिसंबर 2017 को कोर्ट ने श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ मकोका हटा दिया।

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