ममता को नहीं, पश्चिम बंगाल को हुआ नोटबंदी, GST का सबसे बड़ा फायदा

Published : Apr 07, 2019, 02:22 PM ISTUpdated : Apr 07, 2019, 02:29 PM IST
ममता को नहीं, पश्चिम बंगाल को  हुआ नोटबंदी, GST का सबसे बड़ा फायदा

सार

पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2200 किलोमीटर बॉर्डर पर स्थित मालदा, मुर्शिदाबाद और नॉर्थ दिनाजपुर के जिले फेक करेंसी के बड़े केंद्र थे। नोटबंदी के फैसले से फेक करेंसी के काले कारोबार को झटका लगा।

देश में 8 नवंबर 2016 की रात नोटबंदी का फैसला लिया गया और आधी रात से देश में 500 और 1000 रुपये की सर्वाधिक प्रचलित करेंसी को अमान्य घोषित कर दिया गया। इस फैसले की पहली आलोचना पश्चिम बंगाल से आई और नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ आने पर ममता बनर्जी ने दावा किया कि नोटबंदी एक स्कैम है।

अब देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ त्रिणमूल कांग्रेस अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए कही रही है कि केंद्र में उसकी सरकार बनी तो नोटबंदी की जांच की जाएगी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर दावा किया कि नोटबंदी का फैसला राजनीति से ऊपर उठकर देश के हित में लिया गया और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम था।

दरअसल, प्रधानमंत्री के बयान को पश्चिम बंगाल के कारोबार से देखें को देश में पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है जिसे नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा हुआ। हालांकि 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद देश में बंद होने वाली सबसे पहली फैक्ट्री पश्चिम बंगाल की जूट मिल थी। जूट मिल की फैक्ट्री में लगे ताले की तस्वीर ने दिखाया कि किस तरह दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर के लिए जूट मिल पर ताला लग गया क्योंकि मिल के पास मजदूर को देने के लिए नकद नहीं था।

इस तस्वीर का दूसरा पक्ष दिखा रहा है कि नोटबंदी के वक्त पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था किस हद तक नकद करेंसी पर निर्भर थी। पश्चिम बंगाल वैश्विक कारोबार के नक्शे पर हमेशा हावी रहा है और देश का प्रमुख कारोबारी केंद्र रहा है। मौजूदा समय में भी पश्चिम बंगाल की भूमिका बेहद अहम है। चीन से इंपोर्ट और देश के पूर्वोतर और उत्तर भारतीय राज्यों के लिए पश्चिम बंगाल बेहद अहम ट्रांजिट केंद्र है।

वहीं देश में पश्चिम बंगाल का करेंसी प्रेम भी बेहद प्रासंगिक है। कोलकाता और आसपास के शहरों में किसी डिनॉमिनेशन की कटी फटी करेंसी को पॉलीथीन में लपेटकर और स्टेपल करके भी ट्रांजैक्शन होता था। कटे-फटे नोट भी लीगल टेंडर था। इसी प्रेम के चलते पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर से देश में फेक करेंसी का संचार होने लगा।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2200 किलोमीटर बॉर्डर पर स्थित मालदा, मुर्शिदाबाद और नॉर्थ दिनाजपुर के जिले फेक करेंसी के बड़े केंद्र थे। नोटबंदी के फैसले से फेक करेंसी के काले कारोबार को झटका लगा। नई दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू की तरह कोलकाता में भी एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगी। कुछ लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन कुछ दिनों में कैश संचार की स्थित सामान्य होने पर कोलकाता का करेंसी प्रेम की सामान्य हो गया।

नोटबंदी ने कोलकाता में फेक करेंसी पर सर्जिकल स्ट्राइक की। बैंक और मंत्रालय के आंकड़ों में पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा करेंसी एक्सचेंज हुआ है। वहीं नोटबंदी के बाद की प्रक्रिया में कोलकाता का बड़ा बाजार एरिया हवाला का बड़ा केंद्र बना। करेंसी एक्सचेंज के आखिरी दिनों में हालत यहां तक पहुंच गई थी कि एक लाख रुपये जमाकर पांच हजार रुपये तक की रकम मिल रही थी।

लिहाजा, 8 नवंबर 2016 की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने पश्चिम बंगाल को सबसे बड़ा फायदा पहुंचाया है। बंद हुई जूट की कंपनी में काम करने वाले मजदूरों का जनधन योजना के तहत बैंक एकाउंट बन गया है। इसके साथ ही राज्य में करेंसी पर भरोसा जगा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी के बाद संचार हुई नई करेंसी की फेक करेंसी का संचार करने के कई मामले पकड़े गए हैं।

लिहाजा नोटबंदी के इस फायदे के बाद राज्य में जीएसटी बेहद अहम फैसला रहा। देश में जीएसटी लागू होने के बाद फेक रसीद का सबसे ज्यादा मामला पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता दीदी अपने घोषणा पत्र में दावा कर रही हैं कि केंद्र में उनकी सरकार बनी तो वह जीएसटी में सुधार करेंगी। खासबात है कि जीएसटी काउंसिल में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री की अहम भूमिका है। पश्चिम बंगाल अहम कारोबारी केंद्र होने के साथ ही जीएसटी का सबसे अहम केंद्र है। 
 

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