
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन संबंधी खबरों को लेकर केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि परिसीमन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है। यह सफाई उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया था कि गृहमंत्री अमित शाह ने एक बैठक में कैबिनेट से सहयोगियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है।
गृहमंत्रालय की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि परिसीमन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। न ही जम्मू क्षेत्र की विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए आयोग गठित करने का विचार है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मंत्रालय में कैबिनेट मंत्रियों के समूह की बैठक पेट्रोलियम पदार्थों के मुद्दे पर हुई थी, न कि सुरक्षा के मुद्दे पर।'
सरकार के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में तीन डिवीजन जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हैं। कश्मीर आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा डिवीजन है। यह इलाका आतंकवाद के कारण काफी तनावग्रस्त है। वहीं आबादी के लिहाज से दूसरे नंबर पर आने वाले जम्मू के लोगों की शिकायत है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रतिनिधित्व के हिसाब से कश्मीर का पलड़ा भारी है।
साल 2001 की जनगणना के अनुसार, जम्मू क्षेत्र में 53 लाख लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 43% है। 87 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में जम्मू से 37 सीटें हैं। वहीं दूसरी तरफ कश्मीर में 69 लाख लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 55% है। वहीं कश्मीर से विधानसभा में 46 सीटें हैं। वहीं लद्दाख की आबादी 2.7 लाख है। यहां से विधानसभा में कुल चार सीटें हैं।
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