
इस साल की सर्दियों में दूध की सप्लाई कम हो गई है जबकि मांग बढ़ गई है। यही वजह है कि साल 2019 में दूध के दाम बढ़ सकते हैं।
को-ऑपरेटिव डेयरियों ने इस बात का संकेत दिया है। उनका कहना है कि किसानों की ओर से दूध की सप्लाई जरुरत के मुताबिक नहीं रही है।
क्योंकि किसानों को दूध की अच्छी कीमतें नहीं मिल रही हैं। इसलिए साल 2019 में दूध की कीमतों में इजाफा देखा जा सकता है।
इससे पहले साल 2017 में दूध के दामों में प्रति लीटर दो रुपए की वृद्धि हुई थी। 2017 में डेयरी को-ऑपरेटिव ने दूध और दूध उत्पादों के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। एसएमपी और कमोडिटी के दाम स्टेबल रहने की वजह से 2018 में दूध की कीमत नहीं बढ़ी।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, देश में स्किम्ड मिल्क पाउडर का स्टॉक 7 लाख टन था। पिछले एक महीने में इसके दाम में 15 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है और अभी यह 205 रुपये प्रति किलो है। एक्सपोर्ट बढ़ने की वजह से एसएमपी के स्टॉक में कमी आ रही है।
पिछले ट्रेंड को देखने पर पता चलता है कि मार्च के बाद एसएमपी से आधा दूध उत्पादन होता है। एक किलो एसएमपी से 10 लीटर दूध तैयार किया जाता है।
इसलिए मिल्क कंपनियां अंदेशा जता रही हैं कि दो साल के अंतराल के बाद दूध के दाम 2019 में बढ़ेंगे। स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) का अभी कम स्टॉक है और इस साल दूध की सप्लाई में पिछले दो सीजन की तुलना में कमी आई है।
2018 में महाराष्ट्र में दूध किसानों ने कम कीमतों के खिलाफ नाराजगी जताने के लिए आंदोलन किया था। उस वक्त उनसे 16-18 रुपये प्रति लीटर के भाव पर दूध खरीदा जा रहा था। उसके बाद सरकार ने उन्हें अच्छी कीमत दिलाने का वादा किया था।
माना जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सरकार दूध किसानों को अच्छी कीमत दिलाने की कोशिश करेगी, जिसका बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है।
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