
संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में भारत ने इस्रायल के एक प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के लिए मतदान किया गया था। हालांकि चीन और पाकिस्तान ने इस्राइल के प्रस्ताव का विरोध किया था। इस्रायल ने फिलीस्तीन के एक एनजीओ को परिषद में सलाहकार का दर्जा दिए जाने का विरोध किया था। फिलहाल इस्राइल के समर्थन में कई देशों द्वारा साथ दिए जाने के बाद ये प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
फिलीस्तीन के एक मानवाधिकार गैर सरकारी संगठन को परिषद में सलाहकार का दर्जा न दिए जाने प्रस्ताव लाया गया था। जिसको लेकर इस्राइल ने आपत्ति जताई थी और इसमें उसे भारत का भी साथ मिला। इस संगठन के बारे में इस्राइल का कहना है कि उसने अभी तक आतंकी संगठन हमास के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं किया।
भारत का समर्थन मिलने के बाद इस्राइल की जीत हुई है। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र परिषद में इस संगठन को पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं मिल पाया है। क्योंकि इसके लिए लाया गया प्रस्ताव खारिज हो गया है। अब इस प्रस्ताव के खारिज हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र इस एनजीओ के आवेदन लौटाने की तैयारी में है।
क्योंकि इस्राइल के द्वारा उठाई गयी आपत्तियों के बारे में एनजीओ अहम जानकारियों को पेश नहीं कर सका। लिहाजा उसका प्रस्ताव खारिज किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के लिए कराए गए मतदान में 28 मत इस्रायल के पक्ष में तो 15 मत विपक्ष में पड़े। जबकि पांच देशों ने इस प्रस्ताव में हिस्सा नहीं लिया। वहीं प्रस्ताव के विरोध में अपना मत देने वालों में मिस्र, पाकिस्तान, तुर्की, वेनेजुएला, यमन, ईरान चीन समेत कई देश हैं।
इस्रायल के पक्ष में मतदान करने के लिए इस्राइल की सरकार ने भारत सरकार ने आभार जताया है। भारत में इस्राइल की राजनयिक माया कडोश ट्वीट कर भारत सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने अपने ट्विट में लिखा है कि "इस्रायल के साथ खड़े रहने और आतंकी संगठन शहीद को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक का दर्जा देने की अपील को खारिज करने के लिए भारत का धन्यवाद।
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