
राजस्थान में इंसान और जानवर के बीच अनोखे रिश्ते का एक अनोखा उदाहरण सामने आया। प्रदेश के भीलवाड़ा जिले में घर के पालतू बंदर की मौत हो गई। काफी दिनों से रहने के कारण वह बंदर परिवार के सदस्य की तरह ही हो गया था। ऐसे में बंदर की मौत पर परिजनों ने गाजे बाजे के साथ उसकी शव यात्रा निकाली। इसके बाद उसका हिन्दू रीति रिवाज से विधिवत अंतिम संस्कार किया। इस दौरान घर के सदस्यों के साथ मोहल्ले के लोग भी शामिल रहे।
18 साल का नाता टूटा
भीलवाड़ा शहर के बीलिया खुर्द निवासी हंसराज वैष्णव ने बताया कि करीब 18 साल पहले अचानक यह बंदर कहीं से उनके घर आ गया। तब वह काफी छोटा था। उन्होंने उसे कुछ खाने को दे दिया फिर वह वहां से गया ही नहीं और उनके साथ ही रहने लगा। करीब 18 साल बाद मंगलवार को उसका निधन हो गया। कई दिनों से वह काफी सुस्त हो गया था। उम्र का भी असर था। उसके जाने का दूख पूरे परिवार को है। वह हमारे परिवार के सदस्य की तरह ही था। ऐसे में उसका अंतिम संस्कार भी हमने पूरे रीति रिवाज के साथ ही किया है।
पूरे गांव में निकाली गई शवयात्रा
बंदर की मौत के बाद परिजनों ने पूरे गाजे बाजे के साथ उसकी शवयात्रा निकालने का निर्णय लिया। बंदर के शव को एक बेवाण पर लेटाकर माला फूल औऱ सिंदर के साथ लाल गुलाल लगाकर शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान भजन भी बज रहे थे। पूरे कस्बे और मोहल्ले में बंदर की शवयात्रा निकाली गई। शव यात्रा के दौरान फूल माला भी लोग चढ़ा रहे थे।
राजस्थान में पहले भी पुश प्रेम के कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं। एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते के अंतिम संस्कार के साथ तेरवीं का भी आयोजन रखा था जिसमें गांव के लोग शामिल थे। तेरवीं के कार्यक्रम के दिन पालतू कुत्ते की फोटो पर हार चढ़ाकर भी रखा गया था।
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