
मुंबई। मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने तीन महीने की बच्ची के साथ बलात्कार करने और उसके बाद उसकी हत्या करने के जुर्म में 28 वर्ष के ट्रांसजेंडर कन्हैय्या उर्फ कन्नू दत्ता चौगुले को सजा ए मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह आदेश 27 फरवरी को दी गई इस कठोर सजा के पीछे सबसे बड़ी वजह "नेग" विवाद का सामने आया है। बच्ची के परिजनों ने कोर्ट में बताया कि शिशु के जन्म के समय परिवार उस ट्रांसजेंडर को पारंपरिक विदाई "नेग" नहीं दे सके थे। अदालत ने इस कृत्य को 'बर्बर और अमानवीय' करार दिया है। आरोपी कन्नू दत्ता को अपहरण, हत्या, रेप और सबूतों को मिटाने और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।
कोर्ट ने कहा, "जघन्य अपराधों के कारण समाज का सामाजिक ताना-बाना इतना क्षतिग्रस्त हो रहा"
यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामलों के विशेष न्यायाधीश अदिति कदम ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के कारण समाज का सामाजिक ताना-बाना इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। हालाकि सह-अभियुक्त सोनू काले को दोषी नहीं पाया गया, क्योंकि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उसके खिलाफ आरोप साबित करने में असमर्थ था।
पारंपरिक 'विदाई' में साड़ी, 1100 रुपये व नारियल देने पर किया जघन्य अपराध
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जुलाई 2021 में आरोपी ट्रांसजेंडर ने पास में रहने वाली बच्ची का अपहरण कर लिया और उसके साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने बच्चे के जन्म के समय दी जाने वाली पारंपरिक 'विदाई' में एक साड़ी, 1100 रुपये और एक नारियल मांगा था। हालांकि, कोरोना 19 महामारी के कारण परिवार ट्रांसजेंडर की मांग पूरी करने में असमर्थ था। कन्हैया उर्फ कन्नू चौगुले दोस्त सोनू काले (20) के साथ रात वापस लौट आए। उन्होंने रात करीब 2.30 बजे बच्ची का अपहरण कर लिया। फिर बच्ची के शव को मिट्टी में दबा दिया। माता-पिता द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने ट्रांसजेंडर के साथ हो रहे झगड़े के एंगल पर काम किया और दोनों को ढूंढ निकाला। बच्ची का शव जुलाई 2021 में दक्षिण मुंबई के कफ परेड में एक खाड़ी क्षेत्र में दबा मिला था।
कोर्ट ने माना, 'दुर्लभ से दुर्लभतम मामला'
अदालत के मुताबिक आरोपी ट्रांसजेंडर पड़ोस में डर पैदा करना चाहता था, ताकि भविष्य में कोई उसे उपहार "नेग" देने से इनकार न करे। अदालत ने आगे कहा, शिशु के शरीर पर चोटें "बेहद क्रूर और घृणित" पाई गईं और लड़की "पूरी तरह से असुरक्षित" पाई गई। न्यायाधीश कदम ने आरोपी की योजनाबद्ध घटना और अपराध के सावधानीपूर्वक निष्पादन पर प्रकाश डालते हुए टिप्पणी की, कि "एक लड़की की सुरक्षा समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।" आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश में शव को दलदली इलाके में दफना दिया था। अदालत ने कहा, "जिस बर्बर और अमानवीय तरीके से अपराध किया गया, वह इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम मामला' बनाता है। इस अपराध से एक बच्ची के हर माता-पिता की रूह कांप जाएगी। खासकर एक गरीब इलाके में।" अदालत ने अपराध की विकृति को गंभीर परिस्थिति माना और कहा कि आरोपी के प्रति नरमी बरतने का कोई आधार नहीं है, जिसने पश्चाताप का कोई संकेत नहीं दिखाया है।"
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