
पटना। बिहार में अमित शाह की डिजिटल रैली के बाद से चुनावी हलचल तेज हो गई है। राज्य में भाजपा और जदू ने अपनी तैयारियों शुरू कर दी है। लिहाजा अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव खेल दिया है। नीतीश कुमार ने राज्य में 94 हजार सरकारी टीचरों की भर्ती भर्ती करने का फैसला किया है। ताकि विधानसभा चुनाव में फतह हासिल की जा सके। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद से राज्य में उनके विरोधियों को बड़ा झटका लगा है और वह इसे नीतीश कुमार का चुनावी स्टंट बता रहे हैं। नीतीश कुमार के फैसले के बाद राज्य सरकार का कहना है कि राज्य में टीचरों की भर्ती 15 जून से शुरू हो जाएगी।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने टीचर्स की भर्ती के लिए 15 जून से प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है और ये 15 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद 18 जुलाई तक सूची तैयार हो जाएगी और 21 जुलाई तक इसकी काउंसिलिंग भी शुरू हो जाएगी। फिलहाल कोरोना संकट के देखते हुए राज्य में चुनाव इस साल के आखिर होंगे और तब तक राज्य में भर्तियां पूरी हो जाएगी। हालांकि सरकार के इस फैसले के विरोधी सक्रिय हो गए हैं और सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह चुनावी फायदे के लिए इस तरह के फैसले कर रही है। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार का स्टंड है और चुनाव में इसका फायदा सरकार को नहीं होगा।
चुनाव आचार संहिता से पहले बड़े फैसले
बिहार में इसी साल आखिर में विधानसभा चुनाव के चुनाव होने की संभावना है। हालांकि कोरोना के कहर के देखते हुए इसके आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। लिहाजा चुनाव साल होने के कारण राज्य बड़े फैसले कर रही है। ताकि जनता को लुभाया जा सके। नीतीश कुमार आचार संहिता लगने से पहले बड़े फैसले कर जनता को लुभाने के लिए चुनावी दांव चल रहे हैं। ताकि विरोधियों को परास्त किया जा सके।
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