
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को गले लगाने के बाद उठे विवाद पर कांग्रेस के नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि 'बाजवा शांति चाहते हैं।' यहीं नहीं सिद्धू ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की जोरदार पैरवी की थी। लेकिन पाकिस्तानी सेना प्रमुख के इरादे कुछ और ही नजर आ रहे हैं। बाजवा ने एक बार फिर गीदड़भभकी देते हुए कहा है कि वह भारत से अपने जवानों के खून का बदला लेकर रहेंगे।
भारत के साथ 1965 के युद्ध की 53वीं वर्षगांठ के मौके पर शुक्रवार को पाकिस्तान में आयोजित रक्षा दिवस कार्यक्रम में पाक सैन्य प्रमुख ने कहा, 'हम सरहद पर बहे हर लहू का हिसाब लेंगे।' बाजवा यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, पिछले दो दशक से युद्ध के तरीके बदल गए हैं। पाकिस्तान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान की रक्षा में अब तक 76,000 सैनिक शहीद या घायल हुए हैं। इनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी।
बाजवा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऐसी खबरें थीं कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ शांति की पेशकश कर रही है। वहीं पाकिस्तान में प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले इमरान खान ने दोनों देशों के बीच संबंधों के बेहतर होने की उम्मीद जताई है। खास बात यह है कि राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में जब बाजवा भारत के खिलाफ जहर उगर रहे थे, उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी वहां मौजूद थे।
सिद्धू इमरान खान के शपथग्रहण में शामिल होने पाकिस्तान गए थे। उनके इस तरह पाकिस्तान जाने को लेकर काफी बवाल मचा था। 18 अगस्त को सिद्धू ने पाकिस्तान में कहा था, 'मैं राजनेता नहीं, एक दोस्त की हैसियत से यहां आया हूं।' 'मैं हिंदुस्तान से मोहब्बत का एक पैगाम लाया था। जितनी मोहब्बत मैं लेकर आया था, उससे 100 गुना ज्यादा मोहब्बत मैं वापस लेकर जा रहा हूं। जो वापस आया है, वो सूद समेत आया है।' उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिलने का जिक्र करते हुए कहा, 'जनरल साहब ने मुझे गले लगाया और कहा कि वह शांति चाहते हैं।'
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हालांकि पाकिस्तान के वही सेना प्रमुख बाजवा छह सितंबर को भारत को 'मक्कार' देश बताते नजर आए। यही नहीं उनका दावा है कि 1965 की जंग में पाकिस्तान ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे।
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पाकिस्तान में मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता सिद्धू ने कहा था, 'आखिर कब तक हम लाल समंदर में डूबेंगे, अब वक्त आ गया है कि हम इसे नीला बनाएं यानी शांति कायम करें।'
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वहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख अपने सैनिकों के खून का बदला लेने की धमकी दे रहे हैं। वह कहते हैं, हम सरहद पर बहे लहू का हिसाब लेंगे।
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उधर, जनरल बाजवा की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना ने उन्हें 1965 और 1971 का इतिहास याद रखने की सलाह दी है।
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