ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान की नई साजिश

By Team MyNationFirst Published Feb 13, 2020, 6:20 AM IST
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असल में पाकिस्तान में कोर्ट भी सेना के दबाव में काम करते हैं। लिहाजा माना जा रहा कि सेना के दबाव आतंकी वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) मामले में अदालत ने ये फैसला सुनाया है। पाकिस्तान की आतंकरोधी अदालत (एटीसी) ने हाफिज सईद को 11 साल की सजा सुनाई है। असल में 19 फरवरी को पेरिस में एफएटीएफ की बैठक होनी है और इसमें पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में रखा जा सकता है या फिर से ब्लैक लिस्ट में रखा जा सकता है। 

नई दिल्ली। पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बचने के लिए नई नई साजिशें कर रहा है। लिहाजा उसने मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा (जेयूडी) सरगना हाफिज सईद को जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया है। लेकिन माना जा रहा है कि सईद के ये सजा निचली कोर्ट ने दी है और जैसे ही पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर आ जाएगा उसे ऊपरी कोर्ट से जमानत दे दी जाएगी।

असल में पाकिस्तान में कोर्ट भी सेना के दबाव में काम करते हैं। लिहाजा माना जा रहा कि सेना के दबाव आतंकी वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) मामले में अदालत ने ये फैसला सुनाया है। पाकिस्तान की आतंकरोधी अदालत (एटीसी) ने हाफिज सईद को 11 साल की सजा सुनाई है। असल में 19 फरवरी को पेरिस में एफएटीएफ की बैठक होनी है और इसमें पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में रखा जा सकता है या फिर से ब्लैक लिस्ट में रखा जा सकता है। लेकिन पाकिस्तान की पूरी कोशिश है कि वह इन दोनों लिस्ट से बाहर निकले। जनवरी में बीजिंग में चीन ने पाकिस्तान को बचाने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि पेरिस में चीन पाकिस्तान का साथ देगा। 

वहीं पाकिस्तान पाकिस्तान ने एफएटीएफ की बैठक से पहले सईद को जेल में डालकर खुद को बचाने की कोशिश की है। क्योंकि एफएटीएफ ने साफ किया कहा था कि पाकिस्तान को आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही करनी होगी। वहीं उन पर रोक लगानी होगी। पिछली बैठक में ही पाकिस्तान का दावा था कि उसने मदरसों को अस्पताल और स्कूलों में बदल दिया है। क्योंकि एफएटीएफ का आरोप है कि इन मदसरों में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है।

गौरतलब है कि अगर एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर देता है तो उसे वित्तीय संस्थाओं से मिलने वाली आर्थिक मदद मिलनी बंद हो जाएगी। वहीं जो कर्ज मिला है वह पाकिस्तान को जल्द लौटाना होगा। हालांकि एफएटीएफफ की पिछली बैठक में पाकिस्तान चीन और मलेशिया ने बचा लिया था। लेकिन इस बार फिर उसे बचाना इन देशों के लिए आसान नहीं होगा।
 

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