
नई दिल्ली। महाराष्ट्र से भाजपा की दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे अपने ट्विटर के बायो प्रोफाइल से भाजपा शब्द हटा दिया है। लिहाजा अब माना जा रहा है कि वह भाजपा से अलविदा कह सकती हैं। कल ही पंकजा से संकेत दिए थे कि वह अपने पिता के जन्मदिन यानी 12 दिसंबर को कोई बड़ा फैसला ले सकती हैं और इसके लिए उन्होंने अपने समर्थकों से रैली में आने को कहा है।
विधानसभा चुनाव हारने के बाद पंकजा मुडें सार्वजनिक मंचों से गायब है। पंकजा को उनके चचेरे भाई और एनसीपी के विधान मंडल के नेता धंनजय मुंडे ने विधानसभा चुनाव में शिकस्त दी है। मुंडे को एनसीपी के दिग्गज नेता माना जाता है। वहीं पंकजा पिछली फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। किसी दौर में पकंजा को राज्य में सीएम की दौड़ में आगे माना जाता था। लेकिन इस बार चुनाव में मिली हार के लिए वह पार्टी के भीतर गुटबाजी को अहम कारण मान रही हैं। पंकजा उन नेताओं में शामिल थी। जिनकी रैली में पीएम नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार किया था।
फिलहाल पंकजा ने अपने समर्थकों से 12 दिसंबर की रैली के लिए तैयार रहने को कहा है। पकंजा ने कहा कि वह 12 दिसंबर को कोई बड़ा फैसला करेंगे। असल में पंकजा देवेन्द्र फडणवीस से नाराज चल रही हैं। जब वह सीएम थे तो पंकजा का उनके साथ छत्तीस का आंकड़ा था। वहीं अब पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे ने ट्विटर से अपने बायो से भाजपा का नाम हटा लिया है। जबकि इससे पहले पंकजा ने फेसबुक पोस्ट किया था कि वह 8-10 दिन चिंतन कर रही हैं और 12 दिसंबर को इस पर फैसला करेंगी।
माना जा रहा है कि पंकजा भाजपा के नेतृत्व से नाराज चल रही हैं। माना जा रहा है कि वह 12 दिसंबर को देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करेंगी। क्योंकि चुनाव के दौरान ऐसी चर्चा हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र में विरोधी दल को भाजपा के एक गुट ने समर्थन दिया है।
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