ट्विटर के खिलाफ जंग ने दिखाया असर

Anindya Banerjee |  
Published : Feb 05, 2019, 07:49 PM IST
ट्विटर के खिलाफ जंग ने दिखाया असर

सार

संसदीय समिति ने ट्विटर के अधिकारियों को तलब किया है। सूचना और तकनीकी मामलों की संसदीय समिति ने ट्विटर अधिकारियों को समन जारी किया है। रविवार के दिन दिल्ली में ट्विटर के पक्षपाती रवैये के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन हुआ था

सूचना और तकनीकी मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने ट्विटर के अधिकारियों को समन भेजा है। 

पिछले दिनों ट्विटर पर विचारों को दबाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली में एक विशाल प्रदर्शन किया गया था। जिसके बाद अनुराग ठाकुर को एक ज्ञापन सौंपा गया। 


उसपर विचार करने के बाद आज ट्विटर के अधिकारियों को संसदीय समिति ने समन भेज दिया। 

 

ट्विटर के खिलाफ यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी ने ट्विटर के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन का आयोजन किया था। इस संगठन द्वारा जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि "पिछले कुछ महीनों से ट्विटर और फेसबुक व्यवस्थित रूप से ऐसे लोगों की वैचारिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हैं जो गैर-वामपंथी विचारधारा वाले सदस्यों के रुप में जाने जाते हैं। उनके हैंडल को निलंबित करके, उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करने की कोशिश की जा रही है।" उनके ट्रेंड्स को ट्रेंड लिस्ट से हटाना भी उसमें से एक कदम है। 

हालांकि, वामपंथी विचारधारा वाले विचारकों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के आक्रामक, अपमानजनक और धमकी भरे ट्वीट्स की अनदेखी कर दी जा रही है।"

यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी ट्विटर के कार्यालय तक मार्च निकालने के बाद संसदीय समिति को ज्ञापन सौंपा था। 

  इस संगठन का आरोप था कि "... ट्विटर हैंडल की चुनिंदा जांच प्रणाली ने कुछ प्रोपगैंडा चलाने वाले ट्विटर हैंडलों को बार-बार फेक न्यूज फैलाते हुए पकड़े जाने के बावजूद उन्हें वैधता प्रदान कर रखी है। यह ऐसे प्लेटफार्मों की विश्वसनीयता को कम करता है जो फेक न्यूज की चुनौती से निपटने का दावा करता है। 

एक संयुक्त बयान जारी करके इस संगठन ने यह आरोप लगाया था कि "चुनावी वर्ष के दौरान इस तरह का राजनीतिक पूर्वाग्रह दिखाया जाना भारत में चुनावों को प्रभावित करने का एक प्रयास है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के अधिकार का उल्लंघन करता है जो भारतीय लोकतंत्र का एक बुनियादी आधार है। बिना किसी पूर्वाग्रह के सभी पर एक जैसे नियम लागू होने चाहिए।  हालांकि, खातों की रिपोर्टिंग और अकाउंट के वेरिफिकेशन के दौरान इस पूर्वाग्रह की झलक बार बार दिखाई देती है। 

यह पहला मौका था जब इस बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के खिलाफ भारत में लोग सड़कों पर उतरे। 

यह भी पढ़ें- ट्विटर के खिलाफ कुछ इस तरह उबला था लोगों का गुस्सा

ट्विटर पर पहले ही अजीबोगरीब तरीके से ट्विटर हैंडलों को निलंबित करने का आरोप लगाया जा चुका है। इसका एक उदाहरण ट्रू इंडोलॉजी नाम का एक ट्विटर हैंडल है, जिसने कभी किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया। 

इससे पहले भी ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी पर 'घृणा भड़काने' का आरोप लग चुका है। जब वह एक तस्वीर का हिस्सा बने जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में तख्ती थी जिसपर लिखा हुआ था 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को तोड़ो’। 

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