
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को श्रीनगर की मशहूर डल झील का दौरा किया। उन्होंने डल झील की लहरों पर लगभग 15 मिनट बिताए। उनके साथ जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और केन्द्रीय कैबिनेट में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह भी थे।
पीएम मोदी ने इस दौरान डल झील के भीतरी इलाकों की मौजूदा स्थिति और वहां चल रहे संरक्षण कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने झील में जारी संरक्षण कार्यों और चार चिनारी की मौजूदा स्थिति पर अधिकारियों से चर्चा भी की।
जम्मू कश्मीर इन दिनों भीषण ठंड की चपेट में है। प्रधानमंत्री के दौरे के समय भी निकटवर्ती पहाड़ों से आती बर्फीली हवा के थपेड़े भी शरीर को चीर रहे थे। ठंड से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओवरकोट और सिर पर काराकुली टोपी पहन रखी थी।
प्रधानमंत्री के दौरे की वजह से डल झील और उसके आस पास सुरक्षा का सख्त बंदोबस्त किया गया था। झील के विभिन्न हिस्सों में राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के जवान किश्तियों, मोटरबोट में लगातार गश्त कर रहे थे।
स्थानीय प्रशासन ने पहले ही इस इलाके के लिए एडवाइजरी जारी कर रखी थी। जिसके तहत 2 फरवरी दोपहर के बाद से ही डल झील के इलाके को सीलबंद रखा गया था।
यहां पहुंचने से पहले पीएम मोदी ने जम्मू का दौरा किया था। उन्होंने जम्मू में 700 बिस्तरों वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) समेत कई प्रोजेक्स की नींव रखी। केंद्र की तरफ से इन सभी के निर्माण के लिए 750 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
पीएम मोदी ने किश्तवाड़ में 624 मेगावाट की के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की भी नींव रखी। उन्होंने श्रीनगर-आलुस्टेंग-द्रास-करगिल-लेह ट्रांसमिशन प्रणाली को भी राष्ट्र के नाम समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने ही अगस्त 2014 में इस प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। इसके अलावा उन्होंने सजवाल में चिनाब नदी पर डबल लेन ब्रिज की नींव रखी।
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