
मोदी सरकार ने जनवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की थी। जिसमें यह नियम था कि देश का कोई भी व्यक्ति या संस्था बैंक से इस तरह के बॉन्ड खरीद कर राजनीतिक दलों को दान में दे सकती है।
यह स्कीम राजनीतिक दलों के लिए बेहद फायदेमंद रही। पार्टियों ने मार्च से नवंबर के बीच पिछले 9 महीनों में इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 1,045.53 करोड़ रुपए जुटाए।
राजनीतिक दलों को मिलने वाली फंडिंग को पारदर्शी बनाने के मकसद से सरकार ने इस साल जनवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की थी। इसके तहत मेट्रो शहरों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चार मुख्य शाखाओं से कोई भी व्यक्ति या संस्था केवाईसी नियम पूरे कर यह बॉन्ड खरीद कर अपनी पसंद की पार्टी को डोनेट कर सकती है।
इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू करने के बाद सरकार ने छह चरणों में इन्हें बिक्री के लिए जारी किया। पहली बार 10 मार्च को 10 दिन के लिए ये बॉन्ड जारी किए गए थे।
नवंबर तक 1,056.73 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे गए। इसमें से 1,045.53 करोड़ रुपए के बॉन्ड राजनीतिक दलों ने कैश भी करवा लिए।
इलेक्टोरल बॉन्ड के नियमानुसार कोई भी रजिस्टर्ड राजनीतिक दल जिसने पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में 1% वोट हासिल किए हों, वह इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डोनेशन ले सकता है।
सामान्य तौर पर इलेक्टोरल बॉन्ड 10 दिन के लिए जारी किए जाते हैं। लेकिन जिस साल लोकसभा चुनाव हो रहे हों, उस साल में यह बॉन्ड अतिरिक्त 30 दिनों के लिए मिलेंगे।
इलेक्टोरल बॉन्ड की वैलिडिटी जारी करने के बाद 15 दिन तक होती है। यह बॉन्ड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपए की कीमत के होते हैं।
इसपर दान देने वाले या प्राप्त करने वाले की कोई जानकारी नहीं होती।
MyNation Hindi पर पाएं आज की ताजा खबरें (Aaj Ki Taza Khabar)। यहां आपको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ब्रेकिंग न्यूज़ और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं की तुरंत और भरोसेमंद जानकारी मिलती है। राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन और टेक सहित हर बड़ी खबर पर रहें अपडेट—तेज, सटीक और आसान भाषा में।