अभी से शुरू हो गई है ड्रैगन को झटका देने की तैयारी, राखी दिवाली के लिए चीनी आर्डर बंद

Published : Jul 13, 2020, 07:29 PM IST
अभी से शुरू हो गई है ड्रैगन को झटका देने की तैयारी, राखी दिवाली के लिए चीनी आर्डर बंद

सार

फिलहाल देश के कारोबारियों ने चीन से आयात किए जाने वाले खिलौने, लाइटिंग के सामान के लिए नए ऑर्डर देना बंद कर दिया है। हालंकि इसके लिए देश की ट्रेडर्स एसोसिएशन पहले से ही बहिष्कार का अभियान चला रही है। लेकिन पिछले महीने गलवान घाटी की घटना के बाद भारत के कारोबारियों ने चीन से सामान को आयात बंद करने का फैसला किया है।

नई दिल्ली। अगले महीने राखी के त्योहार पर आपको ज्यादा राखी भारत में ही बनीं मिलेंगी। हो सकता है यो थोड़ी महंगी हों। लेकिन चीन को झटका देने के लिए आप देशहित में इन्हें खरीद सकते हैं। फिलहाल कारोबारियों ने चीन को झटका देने के लिए अब चीन को सामान के आर्डर देना बंद कर दिया है।  माना जा रहा है कि इस साल त्योहारी सीजन में देश का बाजार में चीनी उत्पाद नहीं बल्कि देशी उत्पाद नजर आएंगे। क्योंकि जनता में चीनी उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान कम रहा है और लोग देशी उत्पादों की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल देश के कारोबारियों ने चीन से आयात किए जाने वाले खिलौने, लाइटिंग के सामान के लिए नए ऑर्डर देना बंद कर दिया है। हालंकि इसके लिए देश की ट्रेडर्स एसोसिएशन पहले से ही बहिष्कार का अभियान चला रही है। लेकिन पिछले महीने गलवान घाटी की घटना के बाद भारत के कारोबारियों ने चीन से सामान को आयात बंद करने का फैसला किया है। कारोबारियों का कहना है कि अगर भारत चीन से आयात बंद कर दे अगले साल तक चीन को एक लाख करोड़ का झटका आसानी से दिया जा सकता है। इसके लिए कारोबारियों ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

दिल्ली के सदर बाजार के राखी विक्रेता और थोक कारोबारी मगन जैन का कहना है कि अब राखी में इस्तेमाल होने वाली चमकीली चीजें चीन से नहीं आ रही है। ग्राहकों भी देशी राखियों की मांग कर रहे हैं और बाजार में भारत में बनी राखी आ रही हैं। रक्षाबंधन में महज एक ही महीना चबा है लेकिन बाजार में रौनक भी गायब है। कोरोना के कारण इस बार राखी का कारोबार ठंडा पड़ा हुआ है और अब चीन की राखियों की मांग बाजार में कम हो गई हैं। लेकिन बाजार में देशी राखी ज्यादा नहीं आई हैं। लिहाजा कारोबार में तेजी नहीं हैं। उनका  कहना है कि बाजार में अब चीनी खिलौनों की भी मांग कम हो गई है और कारोबारी चीन को आर्डर नहीं दे रहे हैं।

ट्वॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय अग्रवाल के मुताबिक देश में खिलौने का रिटेल कारोबार करीब 18-20 हजार करोड़ रुपये का है वहीं इसमें अभी तक 75 फीसदी हिस्सेदारी चीन की है। लेकिन अब वहीं अब खिलौनों में भारतीय मानक चिह्न् यानी आईएस मार्क का प्रयोग अनिवार्य होगा। लिहाजा चीन के खिलौने कम आ रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में थाईलैंड और मलेशिया से खिलौना का आयात करता है। लेकिन चीन चालाकी ये करता है कि वह खिलौनों के इन दोनों देशों के जरिए भेजता है। लेकिन केन्द्र सरकार के नए नियम के मुताबिक चीन चालाकी नहीं चलेगी।

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